दुनिया में जहां सफेद और चमकते दांतों को सुंदरता का पैमाना माना जाता है, वहीं चीन के युन्नान प्रांत की बुलांग जनजाति में ‘काले दांत’ ही खूबसूरती और शक्ति की पहचान हैं। यहां 14-15 साल की उम्र में कदम रखते ही किशोरों के लिए दांतों को काला करना अनिवार्य होता है। इस प्राचीन परंपरा को ‘रांची’ कहा जाता है। दांतों को काला करने की प्रक्रिया काफी जटिल है और कई दिनों तक चलती है। पहले खट्टे फलों के रस से दांतों को साफ किया जाता है। फिर जलती लकड़ी या चीड़ की राल के धुएं से उन्हें रंगा जाता है। बुलांग समुदाय में यह रस्म सामाजिक अधिकारों से जुड़ी है। जिनके दांत काले नहीं होते, उन्हें वयस्क नहीं माना जाता।


