अर्बन हाट 18 माह में बनना था, 8 साल में एक ईंट तक नहीं जुड़ी, बना कबाड़

रांची के कांके रोड स्थित रॉक गार्डेन के पीछे दिल्ली के अर्बन हाट की तर्ज पर अर्बन हाट बनाने की घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई। रघुवर दास की सरकार में वर्ष 2017 में अर्बन हाट का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन डिजायन के अनुसार निर्माण नहीं होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद निर्माण कार्य ठप रहा। डिजायन में संशोधन के बाद दोबारा निर्माण शुरू हुआ तो सरकार बदल गई। जब हेमंत सोरेन की सरकार बनी तो पुराने कार्यों पर रोक लगा दी गई। लेकिन, वर्ष 2022 में एक बार फिर मुख्यमंत्री ने अर्बन हाट के अधूरे कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद रांची नगर निगम ने अर्बन हाट के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए कंपनी के चयन की प्रक्रिया शुरू की। लगातार एक साल तक टेंडर निकाला गया, लेकिन एक भी कंपनी नहीं आई। डिजायन में संशोधन के बाद अर्बन हाट की संशोधित डीपीआर तैयार की गई। 10.63 करोड़ रुपए की लागत से 18 माह में निर्माण पूरा करने के लिए फिर टेंडर निकाला गया, लेकिन इसके लिए भी कोई कंपनी आगे नहीं आई। इसका नतीजा हुआ कि पिछले आठ सालों में अर्बन हाट में एक ईंट तक नहीं जुड़ी। पहले जो काम हुआ वह भी कबाड़ बन गया है। पिछले तीन वर्षों से निगम का चुनाव नहीं होने से यह प्रोजेक्ट एक कदम आगे नहीं बढ़ा। अधूरी बिल्डिंग में असामाजिक तत्वों का अड्डा अर्बन हाट के अधूरे काम को पूरा नहीं किया गया। इसका नतीजा हुआ कि यह असामाजिक तत्वों का अड्‌डा बन गया। पिछले पांच वर्षों के दौरान असमाजिक तत्वों ने तीन बार यहां आग लगा दी थी। इस वजह से जो भी निर्माण हुआ था, वह पूरी तरह कबाड़ बन गया। यहां लगाए गए ग्रिल सहित अन्य सामग्री की चोरी होगी। अब जुआरियों-नशेड़ियों का यहां जमावड़ा लगा रहता है। स्थानीय लोग बताते हैं शाम ढलते यहां कई गलत कार्य होते हैं। अर्बन हाट बनने से कला-संस्कृति को मिलता बढ़ावा, युवा स्वरोजगार से जुड़ते रांची में अर्बन हाट बनाने का एक मात्र उद्देश्य राज्य के क्षेत्रीय हस्तकला सहित विभिन्न कारीगरों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना है। हाट में कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जाएगी। इससे राज्य की कला-संस्कृति को बढ़ावा मिलता। अर्बन हाट के साथ यहां स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी बनना है। {सेंटर में युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए सिंगापुर की कंपनी इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन को सहयोग करना था। यहां झारखंड के युवाओं को कुल 12 ट्रेड में ट्रेनिंग मिलनी थी। {इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैसिलिटी टेक्नोलॉजी, हॉस्पिटैलिटी एंड रिटेल आदि का प्रशिक्षण देकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जाना था। सरकार बदलने के साथ योजनाएं भी बदली रॉक गार्डेन के पीछे चट्टानों के ऊपर अर्बन हाट बनाने की योजना वर्ष 2016 में बनी थी। इसके बाद 2017 में काम शुरू कराया गया, लेकिन सरकार की तरह यह योजना भी बनती-बिगड़ती रही। दरअसल, तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिल्ली की तर्ज पर अर्बन हाट विकसित करने का निर्देश दिया था, लेकिन उनके इच्छा के अनुसार काम नहीं होने पर उन्होंने इसे बंद करा दिया। जितना काम हुए उस पर करीब पांच करोड़ रुपए खर्च हो गए। इसके बाद मई 2019 में यहां स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाने का आदेश दिया गया। डीपीआर रिवाइज्ड की गई, लेकिन दिसंबर में सरकार बदल गई। इसके बाद हेमंत सरकार ने काम पर रोक लगा दिया। अब मुख्यमंत्री ने अर्बन हाट को दिल्ली के अर्बन हाट की तर्ज पर विकसित करते हुए क्षेत्रीय कला और कलाकारों को मंच देने का निर्देश दिया, तब जाकर अर्बन हाट बनने की राह फिर खुली। निगम बेहतर तरीक से प्लान कर टेंडर कराए राजधानी में स्थानीय कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अर्बन हाट का निर्माण कराया जा रहा था। इसके बनने से स्थानीय कलाकारों को एक मंच मिलता और बाहर से आने वालों को पूरे झारखंड को समझने का मौका मिलता। इससे रोजगार का नया अवसर भी मिलता। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनने से बेरोजगारों का कौशल विकास करके उन्हें भी रोजगार के लायक बनाया जाता। इसका निर्माण बेहद जरुरी है। लेकिन ऊपरी स्तर से ठोस पहल किए बिना अधूरा कार्य पूरा नहीं होगा। निगम को भी चाहिए कि बेहतर प्लान तैयार करके टेंडर करें, ताकि अधूरा कार्य पूरा हो सके।

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