गढ़वा | झामुमो के मीडिया पैनेलिस्ट सह केंद्रीय सदस्य धीरज दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट झारखंड की जनता की उम्मीदों को पूरा करने में असफल रहा है। राज्य के बकाया करोड़ों रुपए, जिन पर झारखंड का संवैधानिक अधिकार है, बजट में पूरी तरह नजर अंदाज किए गए। आदिवासी, दलित और पिछड़े बहुल राज्य होने के बावजूद सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधान कमजोर हैं। खान, खनिज और वन क्षेत्र से समृद्ध झारखंड को विशेष पैकेज न मिलना निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है, लेकिन युवाओं के लिए ठोस रोजगार योजना का अभाव दिखता है। किसानों, ग्रामीण मजदूरों और मनरेगा पर निर्भर परिवारों के लिए बजट में कोई ठोस राहत नहीं है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड की जरूरतों के अनुरूप विशेष घोषणा नहीं की गई। रेल, सड़क और आधारभूत संरचना के नाम पर झारखंड को सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। यह बजट संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है और राज्यों के साथ भेदभाव को दर्शाता है। कुल मिलाकर यह बजट झारखंड के विकास की बजाय उपेक्षा का प्रतीक बनकर सामने आया है।


