बैंक फ्रॉड के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केनरा बैंक को बड़ी राहत दिलाई है। ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय ने जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में कुर्क की गई संपत्तियों का रेस्टिट्यूशन बैंक के पक्ष में करवाया है। तीन अटैच की गई संपत्तियों से जुड़ा यह रेस्टिट्यूशन करीब 45 करोड़ रुपए के मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से करवाया गया है। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो बैंक सुरक्षा और धोखाधड़ी प्रकोष्ठ, नई दिल्ली में दर्ज केस पर आधारित है। आरोप है कि कंपनी, उसके निदेशक पुष्पेंद्र सिंह, परिजन और कुछ बैंक अफसरों ने मिलकर केनरा बैंक से 18.32 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। जांच में फर्जी दस्तावेजों पर वाहन ऋण मंजूर कराने की पुष्टि हुई; न वाहन मिले, न ऋण तय उद्देश्य में लगा। निजी खर्चों में डायवर्ट की लोन की रकम लोन की रकम को आरोपी ने अपने अन्य कारोबार, परिवारजनों के खातों और निजी खर्चों में डायवर्ट कर दिया। डमी कर्जदारों के नाम पर लिए गए लोन की रकम आखिरकार आरोपी ने अपने फायदे के लिए निकाल ली। इससे केनरा बैंक, जबलपुर को नुकसान हुआ।
संपत्ति पहले हुई अटैच
ईडी ने पहले इस मामले में 5.32 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इसे न्यायिक प्राधिकरण ने भी पुष्टि दे दी थी। इसके बाद 13 मार्च 2024 को प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल हुई। पीएमएलए कोर्ट जबलपुर ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोप तय किए। इसलिए बढ़ी संपत्ति की कीमत पीएमएलए के तहत अपराध से खरीदी संपत्तियों को उनके मौजूदा बाजार मूल्य पर आंका जाता है। उस समय की कीमत पर नहीं, जब अपराध हुआ था। इस केस में आरोपी द्वारा जिन संपत्तियों को खरीदा गया था, उनकी कीमत समय के साथ कई गुना बढ़ गई। अदालत ने इन्हीं संपत्तियों को वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर केनरा बैंक को लौटाने का आदेश दिया है। बैंक को भले ही नुकसान 18.32 करोड़ का हुआ था, लेकिन उसे 45 करोड़ की संपत्तियां लौटाई जाएंगी।


