भास्कर संवाददाता | चिकलोद कलां औबेदुल्लागंज ब्लॉक की चार पंचायते – चिकलोद कलां, बरवटपुर, करहोदा और बडबाई आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित हैं। आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद इन गांवों तक पक्की सड़क नहीं बन सकी। कच्चे रास्ते बारिश के मौसम में कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं। इससे गरीब, आदिवासी , महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। हालात यह हैं कि राशन लेने, आंगन ाड़ी जाने, मंदिर पहुंचने और गांव से बाहर निकलने तक में लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। चारों पंचायतों के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग और पंचायत के बीच समन्वय कर तत्काल सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाए। लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। ताकि आदिवासी और गरीब ग्रामीण भी मुख्यधारा से जुड़ सकें। करहोदा: 40 साल बाद भी सड़क का इंतजार करहोदा पंचायत का चमरिया खमरिया मार्ग भी बदहाल स्थिति में है। यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां गांव बसे करीब चार दशक हो चुके हैं। ग्रामीण सुंदर भूरिया, वीर सिंह भूरिया और कैलाश माल बताते हैं कि आज तक पक्की सड़क नहीं बनी। मार्ग वन क्षेत्र में होने के कारण विभागीय अनुमति के अभाव में काम अटका हुआ है। चिकलोद कलां पंचायत : राशन पहुंचना भी चुनौती चिकलोद कलां पंचायत में आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था मर्यादित, आंगनबाड़ी और राशन वितरण केंद्र तक जाने वाला एकमात्र मार्ग पूरी तरह जर्जर है। बारिश में यह रास्ता कीचड़ से भर जाता है। वार्डवासी सुनील नीनामा और छक्कूलाल राजपूत बताते हैं कि राशन उठाकर ले जाते समय कई बार अनाज कीचड़ में गिर जाता है। महिलाएं और बुजुर्ग फिसलकर घायल हो जाते हैं। अब तक सड़क निर्माण की कोई ठोस पहल नहीं हुई। मंदिर का रास्ता भी बदहाल बरवटपुर पंचायत के वार्ड 7 में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता कच्चा है। यही एकमात्र मार्ग है, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आवागमन करते हैं। बारिश के दिनों में महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी होती है। ग्रामीण थान सिंह पटेल का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद पंचायत स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


