ग्वालियर व्यापार मेले में कवि सम्मेलन का आयोजन:देश के विख्यात कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं, बड़ी संख्या में पहुंचे लोग

ग्वालियर व्यापार मेले में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश-विदेश में विख्यात कवियों ने शिरकत की इस दौरान बड़ी संख्या में लोग काव्य पाठ सुनने के लिए पहुंचे। कवि सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि वेदव्रत बाजपेई लखनऊ, डॉ. विष्णु सक्सैना हाथरस, डॉ. कीर्ति काले दिल्ली, दिनेश दिग्गज उज्जैन व गौरव चौहान इटावा , श्वेता सिंह गोरखपुर, डॉ. विनम्र सेन सिंह प्रयागराज, अमित शुक्ला रीवा सहित डॉ रामकिशोर उपाध्याय ग्वालियर, रविन्द्र रवि एवं ज्योति दिनकर अपनी कविताओं का पाठ किया। कवि सम्मेलन को लेकर लोगों में खासा उत्साह भी देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान हास्य और वीर रस की कविताओं पर श्रोताओं में जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर की बेटी डॉ कीर्ति काले सरस्वती वंदना के साथ की। कवियों के क्रम को आगे बढ़ाते हुए पहली प्रस्तुति ग्वालियर की कवित्री ज्योति दिनकर ने अपनी रचना से की। इस दौरान उन्होंने शहीद भगत सिंह को याद करते हुए काव्य पाठ शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने मेरा मिजाज़ खुशनुमा, मैं खुशगवार हूं।।
रखती हूं कलम साथ, मैं साहित्यकार हूं।।
श्रृंगार का दर्पण समझ के ताकना नहीं ,
औरत के साथ साथ, मैं खांडे की धार हूं ।। कविता का पाठ किया। कार्यक्रम के दौरान कवि रविन्द्र रवि ने
’न राजा काम आएगा न रानी काम आएगी
रगों में दौड़ते खूं की रवानी काम आएगी
ज़रूरत जब पड़ेगी देशहित बलिदान देने की
हमारे देश की तब तब जवानी काम आएगी‘ कविता का पाठ किया। इसके साथ ही कवित्री श्वेता सिंह ने जिनके चेहरे बहुत भोले भाले मिले. उनके मन के सभी पृष्ठ काले मिले.विषवमन की हुई जांच पड़ताल जब.नेवले ही यहां सांप पाले मिले कविता सुनाई। कार्यक्रम में कवि अमित शुक्ला ने ’गलती नही है बेटा इसमे तुम्हारी कोई, जान लो ये प्रभु हमें दुख क्यों दिखाए हैं।
चार-चार बेटियों की भ्रूण हत्या करने के, बाद हम तुम जैसे बेटे को जो पाए हैं।‘ कविता सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया।

तो वहीं डाॅ. विष्णु सक्सेना ने जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाये, प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाये, जब भी छूलो बुलंदियां तो ध्यान ये रखना, ज़मीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाये कविता की प्रस्तुति दी।

कवि सम्मेलन में इटावा से आए कवि गौरव चौहान ने ना ही किसी मज़हब न खुदाओ पे टिका है , ना तो ये सियासत की ख़ताओं पे टिका है, भारत के दुश्मनों में नहीं दम जो हिला दें ,
ये मुल्क शहीदों की चिताओं पे टिका है, कविता की प्रस्तुति दी इसके साथ कवि वेद व्रत वाजपेयी ने अभी तीरगे के रंगो का ठीक से उड़ना बाकी है। कटे फटे इस चित्र का पूरा जुड़ना बाकी है पंजा साहब ननकाना में शक्ति प्रदर्शन करना है। हमको भी तो हिंगलाज माता के दर्शन करना है। तिब्बत वाले बौद्ध मठों से आशीषों की आशा है। मानसरोवर का पावन जल पीने की जिज्ञासा है। कविता का पाठ कर लोगों को जोश से भर दिया। कवि सम्मेलन में आए लोगों ने कवियों का तालियां बजाकर जमकर स्वागत किया तो वही उनकी रचनाओं के लिए उनकी जमकर तारीफ भी की।

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