भास्कर न्यूज | बालोद मुक्तानगर हथौद में आयोजित दो दिवसीय मानसगान सम्मेलन में वक्ताओं ने रामकथा और मानस की आध्यात्मिक महत्व बताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तुलसी मानस प्रतिष्ठान के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश देशमुख ने कहा कि जब परमात्मा को धराधाम पर अवतरित होना होता है, तब वे भी ऐसे श्रेष्ठ गर्भ की तलाश करते हैं, जो उनकी अनंत और विराट शक्ति को धारण कर सके। उन्होंने कहा कि भक्तों की प्रार्थना पर भगवान राम जब पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब पूरे ब्रह्मांड में ऐसी कोई माता नहीं मिली जो उनकी ईश्वरीय चेतना की अपरिमित शक्ति को धारण कर सके। अंततः यह सौभाग्य छत्तीसगढ़ की बेटी माता कौशल्या को प्राप्त हुआ, जिन्होंने अपने गर्भ में भगवान राम की अनंत शक्ति को धारण किया। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ की पुण्य धरती का सौभाग्य है कि माता कौशल्या का जन्म यहीं हुआ और भगवान राम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया। मानस मंडलियों ने मानस के विभिन्न प्रसंगों पर संगीतमय प्रस्तुति दी: कार्यक्रम को सरस्वती टेमरीया, संत सुशांत साहेब और दिनेश सिन्हा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जयंत साहू, दीपक हिरवानी, लता संधरे, जागेश्वर साहू, लेखराम साहू की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन में मुक्त महिला मानस मंडली एवं शिव शक्ति मानस मंडली का योगदान रहा। दैनिक कार्यों को जनसेवा में समर्पित करें: तोमन साहू कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ के चेयरमैन तोमन साहू ने सत्संग की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि सत्संग भगवान की कृपा के बिना संभव नहीं है। भागदौड़ भरी जिंदगी में समय निकालकर भगवान की कथा का श्रवण करना चाहिए। अपने दैनिक कार्यों को जनसेवा में समर्पित करना भी प्रभु भक्ति का ही स्वरूप है, यही रामचरित मानस का संदेश है।


