संस्कारी बच्चे चाहत रखने वाले परिवारों को अब सरकारी अस्पताल में गर्भ संस्कार की सलाह मिलेगी। सरकार ने इसकी शुरुआत इंदौर से कर दी है। रविवार को दिव्य संतान गर्भ संस्कार प्रकल्प को राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने का काम रविवार सुबह 10 बजे डेली कॉलेज से किया गया। इसके साथ ही तय हुआ कि इसी के माध्यम से जनजागरण कर समाज के प्रत्येक वर्ग तक गर्भ संस्कार की सोच को पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी मौजूद रहे।
सीएम यादव ने कहा, सशक्त, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण बचपन से शुरू होना चाहिए। इसी उद्देश्य से अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में गर्भ संस्कार के लिए विशेष परामर्श कक्ष बनाए जाएंगे। सीएम ने कहा गर्भावस्था के दौरान मिले संस्कार संतान के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालते हैं। पहले ही दिन आयोजन में 151 नवदंपतियों को दिव्य संतान प्रकल्प का संकल्प दिलाया गया। संतुलित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
जोशी भैयाजी जोशी ने कहा दिव्य संतान और गर्भ संस्कार का प्रकल्प अद्वितीय है। यह केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. अनिल गर्ग ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से गर्भ संस्कार की बातों को प्रमुखता से रखा। आयोजन में अशोक पांडे, गुलवंत कोठारी, राधेश्याम शर्मा, विक्रम सिंह, डॉ. हितेश जॉनी एवं प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक पं. योगेंद्र महंत भी मौजूद थे। इस अवसर पर डॉ. गर्ग एवं डॉ. सीमा गर्ग की दिव्य संतान पर लिखी पुस्तक का विमोचन किया गया। नि:शुल्क काउंसलिंग एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था पं. योगेंद्र महंत ने बताया 2 वर्ष पहले इंदौर में दिव्य संतान गर्भ संस्कार प्रकल्प शुरू हुआ था। इसके बाद उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, जयपुर, नोएडा, मुंबई में भी कार्यशालाएं हुईं। इंदौर को देश में दिव्य संतान प्रकल्प के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का संकल्प विश्व ब्राह्मण समाज संघ, अनंत सेवा न्यास सहित अन्य संगठनों ने लिया। संतान उत्पत्ति के बाद 7 वर्ष तक उनकी काउंसलिंग और प्रशिक्षण की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है।


