गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र में रविवार रात सलामत गेट के पास एक क्रॉकरी शॉप में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों और व्यापारियों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन आग की लपटें तेजी से फैलती रहीं। आशंका जताई जा रही है कि दुकान में रखा करीब 40 से 50 लाख रुपए का सामान जलकर खाक हो गया। बताया जा रहा है कि पास की बिजली लाइन में आग लगने के बाद ही यह हादसा हुआ। आग की सूचना पर मसूरी थाना प्रभारी अजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास की दुकानों को एहतियातन खाली कराया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी करीब एक घंटे तक नहीं पहुंची, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। आग पर काबू पाने की कोशिश पुलिस और स्थानीय लोग करते रहे। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, वहीं फायर विभाग की देरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर… सहारनपुर में युवक से 15.42 लाख की ठगी, अधिक पैसा कमाने का दिया झांसा सहारनपुर में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक युवक से 15.42 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। सिटी कोतवाली क्षेत्र की निर्भयपुरम कॉलोनी निवासी हेमंत कुमार कौशिक को फेसबुक पर SCSLPMA नाम का फर्जी ट्रेडिंग ऐप दिखाई दिया। अधिक मुनाफे के लालच में उन्होंने ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड किया, जिसके बाद ठगों ने उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया और लगातार ज्यादा लाभ कमाने का झांसा दिया। आरोप है कि भरोसे में आकर पीड़ित ने अपने HDFC बैंक खाते से अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर की, जिससे कुल 15,42,560 रुपए की ठगी हो गई। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की तो संपर्क बंद हो गया और ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर… उन्नाव जेल अधीक्षक से 50 लाख ठगे, बेटी को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर फंसाया उन्नाव के जेल अधीक्षक को साइबर ठगों अपना शिकार बनाया। बेटी का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने का झांसा देकर 4 महीने में 50 लाख रुपए ठग लिए गए। जेल अधिक्षक जस्ट डायल के जरिए कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर से संपर्क में आए थे। आरोपी ने उन्हें बाराबंकी के सफेदाबाद स्थित हिंद मेडिकल कॉलेज में सीट सुरक्षित कराने का आश्वासन दिया था। रुपए ट्रांसफर होने के बाद प्रोपराइट ने फोन बंद कर लिया। लखनऊ स्थित ऑफिस भी बंद मिला। जस्ट डायल से कंसल्टेंसी से जुड़ी सारी जानकारी भी हटा दी गई। जेल अधिक्षक ने कंसल्टेंसी संचालक और उसके साथियों के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। साइबर पुलिस मामले की जांच कर रही है। पढ़ें पूरी पढ़िए


