दुनियाभर में भोपाल की पहचान और अंतरराष्ट्रीय महत्व का भोज वेटलैंड यानी हमारा बड़ा तालाब धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। तालाब के संरक्षण को लेकर होने वाले सरकारी दावे, न्यायिक आदेश और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क अब बहुत साफ नजर आने लगा है। इस अंतर को नजदीक से जानने दैनिक भास्कर ने बड़े तालाब की 52 किमी लंबी परिक्रमा की। जो तस्वीर सामने आई, वह चिंताजनक है। तालाब का बमुश्किल 15 किमी हिस्सा ही ऐसा है जहां तालाब सड़क से नजर आता है और उसके पास तक पहुंचा जा सकता है। बाकी लगभग 37 किमी हिस्से में तालाब फार्म हाउस, ग्रामीण मकानों, अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के पीछे छिप गया है। एनजीटी वर्षों से अतिक्रमण हटाने, कैचमेंट एरिया सुरक्षित रखने और अनट्रीटेड सीवेज को तालाब में मिलने से रोकने के निर्देश देता रहा है, लेकिन जमीन पर हालात सुधरने की बजाय बिगड़ते ही जा रहे हैं। 7 हिस्सों में जानिए…बड़े तालाब के चारों ओर हुए अतिक्रमण का हाल 1. ईंटखेड़ी छाप: जंगल के बीच बचा तालाब
यहां कोलांस नदी बड़े तालाब में मिलती है। यहां सीहोर और भोपाल के गांवों का सीवेज और खेतों के केमिकल तालाब में जा रहा है। इसी क्षेत्र के बिलखेड़ा और भमौरी में भी तालाब जंगल के बीच छिपा हुआ है। सड़क से नजर नहीं आता, लेकिन अब तक बचा हुआ है। 2. बैरागढ़: झुग्गियां तेजी से बढ़ रही हैं
बैरागढ़ में तालाब देखने के लिए चंचल चौराहा से करीब 2 किमी अंदर बोरवन जाना पड़ता है। बोरवन का विकास भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत हुआ था लेकिन यहीं एक अधूरा कम्युनिटी हॉल है, जिस पर हाईकोर्ट ने कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण रोक दिया था। तालाब से सटे वन ट्री हिल्स में झुग्गियां बढ़ रही हैं। 3. हलालपुर: मैरिज गार्डन के पीछे छुपा तालाब… हलालपुर के पास कुछ दूर तक तालाब दिखता है, पर इसके बाद लाइन से बने मैरिज गार्डन तालाब को छिपा देते हैं। पुरानी सड़क मौजूद है, लेकिन वहां जाना संभव नहीं है। वीआईपी रोड पर लालघाटी के आसपास जंगल में तालाब छिपा है, पर अवैध कटाई हो रही है। 4. खानूगांव: निर्माणों के कारण पीछे हटता तालाब
एक समय था जब खानूगांव से तालाब दूर से दिखता था, लेकिन अब मकानों और निर्माणों के कारण तालाब देखने के लिए काफी पीछे जाना पड़ता है। करीब दस साल पहले बनी रिटेनिंग वॉल से विस्तार कुछ रुका, लेकिन विरोध के बाद काम रोक दिया गया। आज भी अवैध निर्माण के चलते तालाब धीरे-धीरे पीछे हटता जा रहा है। 5. कोहेफिजा से बोट क्लब: खुला-खुला तालाब कोहेफिजा, रेतघाट, कमला पार्क और बोट क्लब तक
तालाब सड़क से दिखाई देता है। किनारे पार्कों में पैदल पथ बना है। वन विहार के भीतर भी तालाब दिखता है, हालांकि कुछ जगहों पर बाउंड्रीवॉल टूटी हुई है। वन विहार के कारण यहां अतिक्रमण से बचाव। 6. सूरज नगर: फार्म हाउस के पीछे गुम तालाब
भदभदा के आगे दूसरी ओर सूरज नगर में तालाब तक पहुंचना लगभग असंभव है। यह इलाका तालाब के आसपास सबसे ज्यादा निर्माण वाला क्षेत्र बन गया है। फार्म हाउस, अवैध कॉलोनियां, खेतों के बीच बने मकान तालाब को घेर चुके हैं। यहां सीवेज सीधे तालाब में जा रहा है। 7. गोरा गांव-बिसनखेड़ी: अवैध कॉलोनियाें का जाल
सूरज नगर के बाद गोरा गांव और बिसनखेड़ी में भी हालात ऐसे ही हैं। वैध-अवैध कॉलोनियों, मकानों और फार्म हाउस के कारण तालाब तक पहुंच नहीं है। इन क्षेत्रों का सीवेज भी सीधे तालाब में जा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. प्रदीप नंदी, एनवायरमेंट साइंटिस्ट पाल्मर पॉल्यूशन इंडेक्स 27 से ऊपर पहुंचा यानी गंभीर प्रदूषण बड़े तालाब को लेकर हर स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। इसका प्रमाण यह है कि रिकॉर्ड में 943 मुनारें दर्ज हैं। 2016 में एनजीटी निर्देश पर हुए सर्वे में 337 मुनारें पानी में डूबी मिलीं, यानी एफटीएल के भीतर थीं, और 141 गायब हो गईं। आज सही सर्वे हो तो 200 से अधिक मुनारें मिलना मुश्किल होगा। तालाब के किनारों पर मिट्टी डालकर भरने से इसका आकार बदल रहा है। सीवेज, गंदा पानी, गोबर, कचरा और खेतों का जैविक अपशिष्ट तालाब में पहुंच रहा है, जिससे पानी सड़ता है। पाल्मर पॉल्यूशन इंडेक्स 27 से ऊपर है, जो गंभीर प्रदूषण को दर्शाता है। रासायनिक खाद से फास्फोरस-नाइट्रोजन बढ़ने के कारण काई और जलकुंभी फैल रही हैं। फॉस्फोरस सामान्य से 50 गुना, बीओडी(बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 7-22 तक है, जबकि सुरक्षित सीमा 3 है।


