जिले में गीदम ब्लॉक के नक्सल प्रभावित सालनार गांव में पहली बार ऐसा प्रयोग हुआ है, जिसमें एक ही खेत में दलहन (मूंग) और सब्जियों (गोभी-टमाटर) की खेती एक साथ की गई। इस नए मॉडल को अपनाने वाले किसान राजू बघेल हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ जैविक और मिश्रित खेती का रास्ता चुना। अब तक जिले में किसान या तो दलहन उगाते थे या सब्जियां, लेकिन राजू ने दोनों को एक साथ उगाकर साबित कर दिया कि सीमित जमीन से भी अधिक उत्पादन और ज्यादा मुनाफा संभव है। राजू पहले रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर थे, जिससे लागत बढ़ रही थी और मिट्टी खराब हो रही थी। कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने गोबर खाद, जीवामृत,नीम घोल और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग शुरू किया। उन्होंने खरीफ में मूंग और साथ-साथ कतारों में टमाटर व गोभी लगाई। इससे एक ही खेत से तीन तरह की फसल मिली और जोखिम भी कम हुआ। स्थानीय बाजार में जैविक और सामान्य फसलों के दाम में साफ अंतर दिखता है। रासायनिक तरीके से उगाई जाने वाली मूंग 70 से 80 रुपए प्रति किलो बिकती है, जबकि जैविक तरीके से पैदा होने वाली मूंग की कीमत बाजार में 95 से 110 रुपए प्रति किलो तक है। इसके अलावा रासायनिक टमाटर 30 से 40 किलो तो जैविक 0 से 60 रुपए और गोभी जहां 50 रुपए प्रति किलो, तो जैविक गोभी करीब 80 रुपए प्रति किलो तक बाजार में बिक रही है। मिश्रित खेती से मिट्टी में नाइट्रोजन बनी रहती है। मूंग जैसी दलहनी फसल जमीन को उपजाऊ बनाती है, जिससे सब्जियों को ज्यादा खाद नहीं देनी पड़ती। राजू बताते हैं कि पहले 1 एकड़ में 25 हजार रुपए खर्च होते थे, लेकिन अब 12 से 15 हजार में ही फसल तैयार हो जाती है। राजू पहले इसी खेत में सालभर की मेहनत के बाद भी 50 हजार रुपए ही कमा पाता था, लेकिन अब उसकी कमाई बढ़कर 3 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। अब सालनार ही नहीं, आसपास के गांवों से किसान राजू के खेत देखने आ रहे हैं। कृषि विभाग ने इसे मॉडल फार्म घोषित किया है। कई किसान अब दलहन व सब्जी की संयुक्त खेती अपनाने लगे हैं।


