विदिशा की प्राचीन श्रीरामलीला में रविवार को लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन किया गया। इस दौरान 200 मीटर लंबे रोपवे पर हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाते हुए हवा में उड़ते दिखाया गया। हजारों श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। यह रामलीला अपनी अनूठी प्रस्तुति के लिए जानी जाती है, जहां मंच के बजाय पूरे मैदान में रामकथा का जीवंत मंचन होता है। मेघनाद के घातक प्रहार से लक्ष्मण मूर्क्षित हुए मंचन के दौरान सेना युद्ध में मेघनाद ने लक्ष्मण पर घातक अस्त्रों से प्रहार किया। लक्ष्मण ने सभी प्रहारों का जवाब दिया, लेकिन जब मेघनाद उन्हें पराजित नहीं कर सका, तो उसने वीर घातिनी शक्ति का प्रयोग किया। इसके कारण लक्ष्मण मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान जी पहले लंका से सुषेण वैद्य को उनके घर सहित उठा लाए। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय पर्वत की ओर प्रस्थान किए। रामलीला मेला समिति ने इस दृश्य को जीवंत बनाने के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की थी। 200 मीटर रोपवे से उड़कर गए समिति ने अयोध्या भवन से लंका भवन तक लगभग 200 मीटर लंबा और 20 फीट ऊंचा अस्थायी रोपवे बनाया। एल्युमिनियम तार और ग्रिल के सहारे एक विशेष ट्रॉली तैयार की गई थी, जिसमें बैठकर हनुमान जी हवा में उड़ते हुए संजीवनी बूटी लाते हुए दिखाई दिए। यह अलौकिक दृश्य दर्शकों को भावविभोर कर गया और पूरा मेला ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। समिति ने बताया कि 6 फरवरी को राम-रावण युद्ध का भव्य मंचन होगा। विदिशा की यह रामलीला अपनी परंपरा, भव्य प्रस्तुति और नवाचार के कारण देश की प्रमुख और विशिष्ट रामलीलाओं में गिनी जाती है। देखें रामलीला की तस्वीरें


