शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए एक अहम फैसला किया है। सिख धर्म की मर्यादा के खिलाफ AI तकनीक के माध्यम से बनाई जा रही वीडियो, तस्वीरों और अन्य डिजिटल सामग्री के मामलों पर नियंत्रण के लिए SGPC ने एक विशेष उप-समिति का गठन किया है। यह निर्णय SGPC की अंतरिम समिति की बैठक में दिनांक 13 अक्टूबर 2025 को प्रस्ताव संख्या 1002 के तहत लिया गया। इस उप-समिति का उद्देश्य AI से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञों की राय लेना और ऐसे डिजिटल कंटेंट पर रोक लगाने के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है, जो सिख धर्म, गुरु परंपरा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। SGPC द्वारा गठित इस उप-समिति में शिक्षा, प्रशासन और कंप्यूटर साइंस क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जुड़े प्रोफेसर, तकनीकी विशेषज्ञ और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर शामिल हैं, ताकि तकनीकी और धार्मिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर समाधान निकाला जा सके। धार्मिक भावनाओं की रक्षा पर जोर SGPC का मानना है कि AI एक शक्तिशाली तकनीक है, लेकिन इसका दुरुपयोग धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी कारण यह उप-समिति AI से उत्पन्न चुनौतियों का अध्ययन करेगी और भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी। SGPC के अनुसार, यह कदम सिख समाज की धार्मिक मर्यादा, गुरु परंपरा और पंथक मूल्यों की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक है। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे कड़े और व्यावहारिक निर्णय लिए जाएंगे। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का यह फैसला स्पष्ट करता है कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी धार्मिक मूल्यों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की डिजिटल छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


