महेश्वर में आयोजित तीन दिवसीय पवित्र नदी महोत्सव का समापन शनिवार को मैहर बैंड और वायलिन वादन की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ। डॉ. अशोक बाड़ोलिया और उनके साथी कलाकारों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। मैहर बैंड की ऐतिहासिक परंपरा 1918 में शुरू हुई, जब प्रसिद्ध संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खां ने मैहर रियासत के राजा बृजनाथ सिंह जूदेव की प्रेरणा से मैहर वाद्य वृंद की स्थापना की। इस वाद्य वृंद की विशेषता है कि इसमें शामिल दुर्लभ वाद्य यंत्र ‘नलतरंग’, जो बंदूक की नलियों से बनाया गया विश्व का एकमात्र शास्त्रीय वाद्य यंत्र है। कार्यक्रम में सितार, इसराज, सरोद, वायलिन, चेलो, सितार बैंजो, नलतरंग, हारमोनियम और तबला जैसे विभिन्न वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया गया। डॉ. बाड़ोलिया, जो इस कला की दूसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने राग सिंदूरा जिला काफी से कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने निमाड़ी धुन और मार्च पास्ट की प्रस्तुति दी, जिसका समापन बागेश्वरी कन्हन का नहान से हुआ। कलाकारों का सम्मान हुआ कार्यक्रम के आयोजक देवी श्री अहिल्याबाई होलकर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवाजी राव होलकर और अहिल्या कोर्ट महेश्वर के डायरेक्टर युवराज यशवंत राव होलकर ने सभी कलाकारों का अंग वस्त्र और दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम के दूसरे भाग में प्रसिद्ध वायलिन वादिका अनुप्रिया देवताले ने वायलिन वादन किया। जिसमें उनके द्वारा क्लासिकल हिंदुस्तानी शास्त्रीय पर वायलिन वादन किया, जो उन्होंने उस्ताद अमजद अली खान सरोद वादक और पंडित रामनारायण जी से सीखा था। वह बचपन से ही इस विधा से जुड़ी हुई है, उनके साथी कलाकारों में तबले पर पंडित गंधार राजहंस, तानपूरे पर शुभम तिवारी मौजूद रहे। उन्होंने भीम पलासी आलाप बजाया। उन्होंने अपना खुद का कंपोज किया हुआ प्रायोगिक संगीत की भी प्रस्तुति दी। अनुप्रिया ने करीब 40 देश में अपनी प्रस्तुति दी है। पाकिस्तान में सबसे प्रसिद्ध उस्ताद सलामत अली खान और नजाकत अली खान अवॉर्ड जो अब तक किसी हिंदुस्तानी को नहीं मिला है, उनको इस खिताब से नवाजा गया है।


