लोकसभा चुनाव में अयोध्या (फैजाबाद) सीट जीतने के महज 8 महीने 4 दिन बाद ही सपा को बड़ा झटका लगा है। इस सीट पर अब तक की सबसे बड़ी जीत भाजपा ने दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी चंद्रभानु ने सपा प्रत्याशी और सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को 61 हजार से अधिक वोटों से हराया। मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में उप चुनाव राष्ट्रवाद बनाम परिवारवाद की जंग में भाजपा के राष्ट्रवाद की जीत हुई है। भाजपा ने सपा का पीडीए (पिछड़ा–दलित और अल्पसंख्यक) को भी तोड़ दिया। भाजपा इस जीत को पंचायत चुनाव 2026 और विधानसभा चुनाव 2027 तक मुद्दा बनाएगी। देश में भी समर्थकों और जनता को संदेश देगी कि रामनगरी में भाजपा का वर्चस्व कायम है। लोकसभा में अयोध्या सीट हारने के बाद मिल्कीपुर उपचुनाव में सीएम योगी के नेतृत्व में सरकार ने पूरी ताकत लगाई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की अगुआई में संगठन ने भी सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर सपा को हर मोर्चे पर घेरने में कसर नहीं रखी। बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने लगातार मिल्कीपुर में प्रवास किया। उन्होंने पन्ना प्रमुख बनाने में विशेष ध्यान दिया। मिल्कीपुर से बाहर रहने वाले के कोर वोटर्स को मतदान के दिन मिल्कीपुर बुलाकर मतदान कराया। प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब
योगी सरकार और भाजपा ने मिल्कीपुर उपचुनाव को प्रतिष्ठा का विषय बनाया था। प्रतिष्ठा बचाने के लिए पूरी ताकत भी लगाई। हालांकि उपचुनाव को सत्ताधारी दल का चुनाव माना जाता है, लेकिन यूपी में ऐसे भी उदाहरण रहे हैं, जब विपक्ष ने उपचुनाव जीता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है- लोकसभा चुनाव में अयोध्या में भाजपा की हार से भाजपा को दलित और पिछड़े वोट बैंक में हैसियत के पैमाने पर कमजोर माना गया था। लेकिन अब मिल्कीपुर जीत से भाजपा ने साबित करेगी कि पार्टी का राजनीतिक वजूद कायम है। विपक्ष को झटका लगेगा
कुंदरकी, मीरापुर के बाद अब मिल्कीपुर में हार से सपा को झटका लगेगा। भाजपा भी सपा को हतोत्साहित करने की पूरी कोशिश करेगी। 2027 में विधानसभा चुनाव को लेकर इस जीत को माहौल बनाने की पूरी कोशिश करेगी, विपक्ष को हतोत्साहित करने का मौका मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा को अब पीडीए, संविधान और आरक्षण के मुद्दों के अतिरिक्त नया मुद्दा तलाशना होगा। हालांकि विपक्ष यह कहता रहा है कि यह जीत भाजपा की नहीं बल्कि सरकारी मशीनरी की जीत है। अवधेश प्रसाद को भी झटका
फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भी मिल्कीपुर में हार से झटका लगा है। 2022 में अवधेश प्रसाद मिल्कीपुर से 13 हजार से अधिक वोटों से जीते थे। लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने 7733 वोटों की बढ़त बनाई थी। इससे पहले 2012 में भी वह यहां से विधायक रहे हैं। इस बार उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत बेटे अजीत प्रसाद को सौंपने के लिए उन्हें मैदान में उतारा, लेकिन महज आठ महीने में जनता ने उन्हें और उनके बेटे को नकारकर अवधेश प्रसाद को भी झटका दिया। लोकसभा चुनाव जीत के बाद वह जिस तरह सपा का चेहरा बने थे, मिल्कीपुर हार से उनका कद भी घटेगा। त्वरित कार्रवाई का लाभ मिला
मिल्कीपुर में चुनाव के दौरान एक दलित युवती की बलात्कार के बाद हत्या को सपा ने मुद्दा बनाने का प्रयास किया। फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद मीडिया के सामने भावुक भी हुए। लेकिन सरकार ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इससे सपा का मुद्दा नहीं चल सका, वहीं भाजपा ने इसे सपा के खिलाफ ही कार्ड बना लिया। भाजपा की जीत के हीरो अब एक्सपर्ट का क्या कहना है…. लोकसभा चुनाव में 7733 से जीती थी सपा
लोकसभा चुनाव 2024 में फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र के मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा के अवधेश प्रसाद 7733 वोट से जीते थे। अवधेश प्रसाद को 95612 और भाजपा के लल्लू सिंह को 87879 वोट मिले थे। संविधान बदलने और आरक्षण समाप्त करने के नरेटिव ने मिल्कीपुर में भाजपा को नुकसान पहुंचाया। भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह ने ही सबसे पहले 400 से अधिक सीटें जीतने पर संविधान बदलने वाला बयान दिया था। इससे लल्लू सिंह को फैजाबाद और भाजपा को पूरे यूपी में नुकसान हुआ। विधानसभा में अब भाजपा के 258 सदस्य
विधानसभा में अब भाजपा के सदस्यों की संख्या 257 से बढ़कर 258 हो गई है। विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने 255 विधायक जीते थे। उप चुनाव में लगातार मिल रही जीत से अब सदस्य संख्या बढ़कर 258 हो गई है। इस तरह विधानसभा में अब एनडीए की संख्या 291 पहुंच गई है। भाजपा के 258, अपना दल (एस) के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। अब मिल्कीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास पढ़िए- 2012 में आरक्षित हुई सीट
मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र 1967 में अस्तित्व में आया था। 2010 में हुए नए परिसीमन के बाद मिल्कीपुर 2012 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। एससी आरक्षित सीट पर सपा के अवधेश प्रसाद पासी 2012 और 2022 में चुनाव जीते। 2017 में भाजपा के बाबा गोरखनाथ चुनाव जीते थे। मित्रसेन यादव का दबदबा रहा
मिल्कीपुर सीट को 2012 तक सीपीआई नेता मित्रसेन यादव की सीट माना जाता था। मित्रसेन 1977, 1980, 1985, 1993, 1996 में विधायक रहे। मित्रसेन के बाद उनके बेटे आनंद सेन 2002 में सपा और 2007 में बसपा से विधायक चुने गए। जनसंघ से भाजपा तक तीन बार जीते
मिल्कीपुर में 1967 से 2022 तक केवल तीन बार ही जनसंघ और भाजपा जीते हैं। 1969 में भारतीय जनसंघ के हरिनाथ तिवारी विधायक चुने गए। अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान रामलहर में 1991 में पहली बार भाजपा के मथुरा प्रसाद तिवारी चुनाव जीते। 2017 में बाबा गोरखनाथ ने चुनाव जीता।


