नीट पीजी की तीसरे राउंड की काउंसलिंग हुई पूरी:प्रदेश में 257 मेडिकल सीटें बढ़ीं, निजी कॉलेजों में सरकारी से 3.5 गुना ज्यादा

नीट पीजी की तीसरे राउंड की काउंसलिंग पूरी हो गई है। इस दौरान 800 नीट पीजी अभ्यर्थियों ने अपनी सीट एनआरआई कोटे में कन्वर्ट करा ली हैं। एनआरआई कोटे में सीट महंगी होने के कारण कॉम्पिटिशन कम रहता है। इसकी फीस 45-95 लाख प्रतिवर्ष होती है। हाल में एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) ने देश में नीट पीजी की 8416 सीटें बढ़ाई हैं। अब​ विभिन्न कॉलेजेज में 58,331 पीजी मेडिकल सीट हो गई हैं। राजस्थान में सरकारी, प्राइवेट, ट्रस्ट और सोसायटी के मेडिकल कॉलेजेज की सीट्स मिलाकर कुल 257 सीट्स बढ़ाई गई हैं। खास बात यह है कि इनमें से सरकारी कॉलेजेज में महज 58 सीट्स बढ़ाई हैं और 199 सीट्स प्राइवेट, ट्रस्ट और सोसायटी के मेडिकल कॉलेजेज की हैं। यह सरकारी कॉलेजेज से 3.5 गुना ज्यादा है। राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजेज में सीट्स बढ़ाई गई हैं। लेकिन सबसे ज्यादा उन्हीं डिपार्टमेंट्स में सीट्स बढ़ाई गई हैं जिनमें पहले से सीट्स खाली जा रही हैं। नीट पीजी में पहले से ही सबसे ज्यादा 689 सीट्स एमडी एनेस्थीसियोलॉजी में खाली थी। इसके बाद एमएस जनरल सर्जरी (650) और एमडी जनरल मेडिसिन (567) हैं। हर कॉलेज में इन्हीं डिपार्टमेंट्स में ज्यादा सीट्स बढ़ाई गई हैं। सबसे ज्यादा जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज में बढ़ी सीट्स राजस्थान में प्राइ‍वेट कॉलेजेज में सबसे ज्यादा 41 सीट्स उदयपुर के गीतांजलि मे​डिकल कॉलेज में बढ़ाई गई हैं। डिपार्टमेंट के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा एमडी पीडिएट्रिक्स, एमडी जनरल मेडिसिन, एमडी एनेस्थेसियोलॉजी और एमएस ऑर्थोपेडिक्स में सीट्स बढ़ाई हैं। इसके अलावा सरकारी कॉलेजेज में जोधपुर के डॉ. एसएन मे​डिकल कॉलेज में सबसे ज्यादा 35 सीट्स बढ़ाई गई हैं। वहीं एसएमएस मेडिकल कॉलेज में एमडी पेलिएटिव मेडिसिन में 3 सीट्स बढ़ाई हैं। फीस की बात करें तो प्राइवेट कॉलेजेज में एक साल की फीस लगभग 45-95 लाख रुपए होती है। नीट पीजी 3 साल का स्पेशलाइजेशन होता है, ऐसे में एमबीबीएस डॉक्टर्स को प्राइवेट कॉलेज से स्पेशलाइजेशन करने के ​लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपए फीस देनी होती है। “सीट बढ़ाई हैं, लेकिन ज्यादातर प्राइवेट कॉलेज की। जहां फीस ज्यादा होती है और कम मार्क्स में भी पीजी हो जाता है। इससे मेडिकल सेक्टर का प्राइवेटाइजेशन हो रहा है और डॉक्टर्स की क्वालिटी गिर रही है। यही कारण है कि हमें अच्छे स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स नहीं​ मिल पा रहे हैं।”
-डॉ. विवेक पांडे, मेडिकल एजुकेशन एक्सपर्ट

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