मजीठिया की रिहाई से पंजाब की सियासत में हलचल:AAP का ड्रग्स नैरेटिव कमजोर, अकाली दल एग्रेसिव होगा; जानिए और क्या असर

पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया आय से अधिक संपत्ति मामले में आज जेल से बाहर आ रहे हैं। उनके बाहर आने से पहले पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मजीठिया ऐसे समय में जमानत पर रिहा हो रहे हैं, जब पंजाब विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय रह गया है। वहीं, तरनतारन उपचुनाव और जिला परिषद व ब्लॉक समिति चुनावों में शिरोमणि अकाली दल के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। पॉलिटिशियन इसे अकाली दल के लिए अच्छा संकेत मान रहे हैं। जबकि पार्टी इस चीज को कैश कर रही है। यहां तक पंजाबी सिंगर भी अकाली दल के अच्छे प्रदर्शन पर गाने गा रहे हैं। ऐसे में मजीठिया की वापसी से पार्टी में नई ऊर्जा आएगी।। मजीठिया SAD के सबसे प्रभावशाली और आक्रामक चेहरों में से एक हैं। खासकर जट्ट सिख समुदाय और माझा क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है। अब वे एक बार फिर पार्टी के आक्रामक नेता की भूमिका में नजर आ सकते हैं। मजीठिया सक्रिय रूप से प्रचार, रैलियों और पार्टी को एकजुट करने में भूमिका निभा सकते हैं, जिससे SAD की 2027 चुनावी तैयारियों को मजबूती मिलेगी। अब सवाल-जवाव में पढ़िए उनके बाहर पर क्या असर दिखेगा… सवाल: AAP पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: आम आदमी पार्टी (AAP) ने मजीठिया को ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों से जोड़ते हुए उन्हें “ड्रग तस्करों का संरक्षक” बताकर पेश किया था। खुद AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल रैलियों में बिना नाम लिए मजीठिया को जेल भेजने का श्रेय लेते रहे हैं। जमानत मिलने से AAP का यह नैरेटिव कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, AAP अकाली दल पर हमला जारी रखने की कोशिश करेगी। एक दिन पहले AAP के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि “जमानत मिलना बरी होना नहीं है। हमारे पास मजबूत सबूत हैं।” लेकिन विपक्ष इसे सरकार की जांच की कमजोरी बताएगा। इससे AAP की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। क्योंकि मजीठिया अब बाहर आकर सरकार पर सीधे हमले कर सकते हैं और ड्रग्स मामलों को राजनीतिक साजिश बता सकते हैं। जमानत मिलने से ठीक पहले राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने जेल में मजीठिया से मुलाकात की और ड्रग्स के आरोपों को झूठा बताया। इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि डेरा ब्यास का पंजाब में बड़ा वोट बैंक है। अमृतसर, तरनतारन, पठानकोट, गुरदासपुर, लुधियाना, जालंधर, पटियाला, संगरूर और बठिंडा सहित कई जिलों में डेरा ब्यास का प्रभाव है। सवाल: कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: मजीठिया पर NDPS एक्ट के तहत मामला कांग्रेस सरकार के समय 2021 में दर्ज हुआ था, जब उन्हें ड्रग तस्करी के बड़े संरक्षक के रूप में पेश किया गया। हालांकि, 2022 में उन्हें NDPS मामले में जमानत मिल गई थी और पंजाब सरकार की SLP को 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। यानी कांग्रेस का ड्रग्स वाला मुख्य नैरेटिव पहले ही कमजोर हो चुका था। आय से अधिक संपत्ति का केस 2025 में विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया, जो AAP सरकार की कार्रवाई है। इसलिए यह मामला अब राजनीतिक बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस को इस पूरे घटनाक्रम से सीधे कोई बड़ा राजनीतिक लाभ मिलता नहीं दिख रहा। लेकिन वह जरूर यह मुद्दा उठाएगी कि AAP सरकार की कमजोर जांच के कारण मजीठिया को जमानत मिली। —— ये खबर भी पढ़ें… थोड़ी देर में जेल से बाहर आएंगे मजीठिया, डेरा ब्यास मुखी की क्लीन चिट पर CM मान का तंज पंजाब के पूर्व मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की थोड़ी देर में पटियाला की नाभा जेल से रिहाई होगी। मजीठिया की रिहाई को लेकर नाभा जेल के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। मोहाली कोर्ट में मजीठिया की रिहाई को लेकर कागजी कार्रवाई हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इसके बाद उनके वकील नाभा जेल के लिए रवाना हो गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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