जैसलमेर जिला न्यायालय परिसर में अति संवेदनशील गवाह बयान केंद्र की शुरुआत की गई। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधिपति और जैसलमेर न्याय क्षेत्र के संरक्षक जस्टिस इंद्रजीत सिंह ने इस केंद्र का लोकार्पण किया। यह प्रदेश का पहला ऐसा केंद्र है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार तैयार किया गया है, ताकि बच्चों, महिलाओं और मानसिक रूप से कमजोर गवाहों के बयान बिना दबाव और डर के दर्ज हो सकें। सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस के अनुसार तैयार केंद्र जिला न्यायालय परिसर में स्थापित यह वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। गंभीर अपराधों, खासकर पॉक्सो एक्ट और महिला उत्पीड़न मामलों में गवाहों को कोर्ट के माहौल, आरोपी की मौजूदगी और जिरह से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इस केंद्र का उद्देश्य ऐसे गवाहों को सुरक्षित और सहज वातावरण उपलब्ध कराना है। क्या है ‘अति संवेदनशील’ गवाह? कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चे, यौन शोषण के शिकार व्यक्ति और मानसिक रूप से कमजोर लोग, जिन्हें आरोपी के सामने आने से मानसिक आघात हो सकता है, अति संवेदनशील गवाह की श्रेणी में आते हैं। यह केंद्र इन्हीं गवाहों के मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष बयान प्रक्रिया को सुनिश्चित करेगा। केंद्र की प्रमुख विशेषताएं: त्वरित और सुगम न्याय के लिए प्रतिबद्ध: जस्टिस इंद्रजीत सिंह इस मौके पर जस्टिस इंद्रजीत सिंह ने कहा, “जैसलमेर में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में प्रदेश का पहला पूर्ण केंद्र बनना गर्व की बात है। हमारा लक्ष्य है कि न्यायालयों से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या न आने दी जाए। त्वरित और सुगम न्याय के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।” उन्होंने विशेष रूप से जिला न्यायाधीश ओमी पुरोहित के प्रयासों की सराहना की, जिनके विजन के कारण यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सका।
इस दौरान जिला न्यायाधीश ओमी पुरोहित, विशिष्ट न्यायाधीश देव कुमार खत्री, चंद्र प्रकाश सिंह, एडीजे महेंद्र अग्रवाल, सीजेएम विजेंद्र कुमार और एसीजेएम सौभाग्य सिंह चारण मौजूद रहे। निर्माण कार्य से जुड़े अधिशाषी अभियंता नीरज सोनी व सहायक अभियंता मनजीत सिंह का भी अभिनंदन किया गया।


