जैसलमेर में आशा सहयोगिनियों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी:25 हजार न्यूनतम वेतन और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

जैसलमेर में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि आशा कर्मियों को शीघ्र राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें कम से कम 25 हजार रुपए प्रति महीना मानदेय दिया जाना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। न्यूनतम मजदूरी और पेंशन की मांग भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री महिपाल सिंह पंवार ने कलेक्ट्रेट पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आशा सहयोगिनियां दिन-रात फील्ड में काम करती हैं, लेकिन उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि आशा कर्मियों को शीघ्र राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें कम से कम 25 हजार रुपए प्रति महीना मानदेय दिया जाना चाहिए। जिला अध्यक्ष राहुल दवे ने सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मानदेय से PF की कटौती अनिवार्य की जाए ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन मिल सके। साथ ही रिटायरमेंट पर 5 लाख रुपये की एकमुश्त ग्रेच्युटी की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। डिजिटल इंडिया में खराब संसाधन संयोजक जेठी चौधरी ने बताया कि ऑनलाइन रिपोर्टिंग और डेटा एंट्री का काम बढ़ गया है, लेकिन सरकार द्वारा दिए गए संसाधन बेहद निम्न स्तर के हैं। उन्होंने मांग की कि कार्य में गति लाने के लिए कार्यकर्ताओं को उत्तम क्वालिटी के टैबलेट उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, मूल कार्य के अलावा किए जाने वाले अन्य अतिरिक्त कार्यों के लिए अलग से प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए। पदोन्नति और प्रशिक्षण पर जोर ज्ञापन में मांग की गई कि 10 साल का अनुभव रखने वाली और स्नातकोत्तर (Post-Graduate) शिक्षित आशा सहयोगिनियों को ‘आशा सुपरवाइजर’ के पद पर पदोन्नत किया जाए। इसके अलावा, योग्यता के अनुसार उन्हें ANM की ट्रेनिंग दी जाए ताकि वे मिशन इंद्रधनुष और टीकाकरण जैसे अभियानों में अधिक कुशलता से सहयोग कर सकें और अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें। चुनावी ड्यूटी और भर्ती में आरक्षण कार्यकर्ताओं ने इस बात पर भी रोष जताया कि चुनाव ड्यूटी के दौरान उनसे काम तो लिया जाता है, लेकिन किसी भी तरह का मानदेय नहीं दिया जाता। उन्होंने चुनावी मानदेय के भुगतान और NHM की संविदा भर्तियों में आशा सहयोगिनियों को प्राथमिकता देने की मांग की। ये रहे मौजूद इस अवसर पर रूपा देवी (जिला अध्यक्ष), मंजू (संयुक्त महामंत्री), नूतन, टीना, भावना, रेखा, हुआ कंवर, फरीदा, गुड़ी, चंदू, संतोष, ममता, रेवती और रायशा सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियाँ उपस्थित रहीं।

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