पंजाब सरकार को शहरी निकाय चुनावों के मामले में हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के 9 नगर निगमों और 100 से अधिक म्युनिसिपल कमेटियों के चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक सरकार वार्डबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि वार्डबंदी को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं में पहले ही नोटिस जारी हो चुके हैं, इसके बावजूद पंजाब सरकार के मुख्य सचिव की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने इस लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह रवैया न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना जैसा है। जवाब आए बिना नोटिफिकेशन नहीं कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक नगर निगमों और नगर समितियों के चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी के साथ ही चुनावी तैयारियों पर पूर्ण विराम लग गया। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी है कि नई वार्डबंदी में मनमानी की गई है। आरोप है कि परिसीमन में राजनीतिक पक्षपात किया गया और जनसंख्या संतुलन का भी ध्यान नहीं रखा गया।
इन्हीं आरोपों को लेकर एक के बाद एक याचिकाएं दाखिल हुईं, जिनकी संख्या अब दर्जनों तक पहुंच चुकी है। 9 नगर निगमों की वार्डबंदी पर रोक हाईकोर्ट में जिन नगर निगमों की वार्डबंदी को सीधे चुनौती दी गई है, उनमें
बटाला, पठानकोट, कपूरथला, होशियारपुर, मोहाली, बठिंडा, अबोहर, मोगा और बरनाला शामिल हैं।
इन सभी नगर निगमों के चुनाव की अधिसूचना पर 18 फरवरी तक रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही राज्य की 100 से अधिक म्युनिसिपल कमेटियां भी इस आदेश के दायरे में आ गई हैं। सरकार की चुनावी टाइमलाइन पर संकट हाईकोर्ट के इस आदेश से पंजाब सरकार की शहरी निकाय चुनाव कराने की पूरी योजना पर संकट खड़ा हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी होने के बावजूद अब अदालत की अनुमति के बिना चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। उसी दिन यह तय होगा कि सरकार को कोई राहत मिलती है या फिर कोर्ट अपना अंतरिम आदेश आगे भी जारी रखेगा।
फिलहाल पूरे पंजाब में शहरी निकाय चुनावों पर न्यायिक ब्रेक लगा हुआ है, जिसे राजनीतिक हलकों में बड़ा संवैधानिक झटका माना जा रहा है।


