शाजापुर जिले के ग्राम गिरवर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को संतरा उत्पादक किसानों के लिए ट्रेनिंग दी गई। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों को संतरे की खेती में आ रही चुनौतियों और उनके वैज्ञानिक समाधानों की जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिक डॉ. जी.आर. अंबावतिया ने बताया कि जिले के 12 हजार हेक्टेयर में संतरे की खेती होती है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से फल न लगने (अफलन) की समस्या आ रही है। इसका मुख्य कारण कीट और पानी के प्रबंधन में कमी है। उन्होंने ‘काली’ नामक कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा के छिड़काव की सलाह दी। फसल चक्र और जल प्रबंधन वैज्ञानिकों ने किसानों को सुझाव दिया कि संतरे के बगीचों में गेहूं जैसी अधिक पानी वाली फसलें न लगाएं, क्योंकि संतरा कम पानी की फसल है। इसके बजाय कम पानी वाली अंतरवर्तीय फसलें लेने और बगीचा 5 वर्ष का होने के बाद कोई भी अन्य फसल न लगाने की बात कही गई। साथ ही, जल निकासी के लिए नए पौधों का रोपण रेज्ड बेड (ऊंची क्यारियों) पर करने पर जोर दिया गया। गुणवत्तापूर्ण पौध और मूल्य संवर्धन किसानों को अच्छी किस्म के पौधों के लिए राष्ट्रीय संतरा अनुसंधान केंद्र, नागपुर से संपर्क करने की सलाह दी गई। संगोष्ठी में संतरे के जूस, कैंडी, औषधीय उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधनों जैसे मूल्य संवर्धित उत्पादों के माध्यम से आय बढ़ाने के उपाय भी साझा किए गए।


