पीएयू लुधियाना नहीं जाना पड़ेगा, खाद की बर्बादी रुकेगी, वैज्ञानिक सलाह से बढ़ेगी किसानों की आमदन

अमनदीप सिंह | अमृतसर जिले के किसानों को अब फसल रोग, वायरस और पोषक तत्वों की कमी की जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। रणजीत एवेन्यू स्थित खेती भवन में जिले का पहला प्लांट हेल्थ क्लीनिक एंड फार्मर एडवाइजरी एवं ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जो 52.70 लाख रुपए से बनेगा। यह परियोजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लागू की जा रही है। गौरतलब है कि अब तक फसल रोगों और वायरस की वैज्ञानिक जांच के लिए किसानों को पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (पीएयू) लुधियाना तक निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा पहली बार जिला स्तर तक लाई जा रही है। प्लांट हेल्थ क्लीनिक एवं फार्मर एडवाजरी सेंटर आधुनिक तकनीक से लैस होगा, जहां फसलों और मिट्टी की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। यहां लीफ न्यूट्री एनालाइजर, पीएच मीटर, रिफ्लेक्टो मीटर, प्रिजर्व सैंपल एंड चार्ट जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं। इन मशीनों की मदद से फसल में पोषक तत्वों की कमी, बीमारी और वायरस की स्टीक पहचान की जा सकेगी। अब तक फसल में वायरस या बीमारी फैलने की स्थिति में कृषि अधिकारियों को सीधे खेतों में जाकर निरीक्षण करना पड़ता था और मौके पर ही अनुमान के आधार पर सलाह देनी होती थी। कई बार सही जांच न होने के कारण किसान जरूरत से ज्यादा खाद और कीटनाशक डाल देते थे, जिससे खर्च बढ़ता था और फसल को नुकसान भी होता था। प्लांट हेल्थ क्लीनिक में सैंपल लाकर जांच की जाएगी, जिससे समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा। इससे किसानों की आमदन बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक खाद डालने से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी खराब होती है। रणजीत एवेन्यू में खेती भवन। ^सेंटर सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण और सलाह शिविर भी लगाए जाएंगे। जिले में पहली बार बन रहे प्लांट हेल्थ क्लीनिक से किसानों को फायदा होगा। -डॉ. गुरसाहिब सिंह, जिला खेतीबाड़ी अधिकारी। किसान लखबीर सिंह निजामपुर ने कहा कि अब तक अंदाजे से खाद डालते थे जिससे खर्च ज्यादा हो जाता था। अगर जांच के बाद सही सलाह मिलेगी तो नुकसान बचेगा। वहीं इस मशीनों से असली व नकली खाद की भी जांच होनी चाहिए। यह केंद्र किसानों के लिए बहुत जरूरी था। इससे खेती आधुनिक और फायदेमंद बनेगी। सेंटर की मदद से किसानों को पता चलेगा कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद और पोषक तत्व जरूरी हैं। इससे अनावश्यक खर्च रुकेगा और उत्पादन बेहतर होगा। खास बात यह रहेगी कि अगर कोई अपने घरेलू बगीचे में कुछ लगाने की सोच रहा है तो वहां कौन सी पैदावार सही रहेगी। वह भी फायदा ले सकेंगे।

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