मप्र में कैंसर अब क्षेत्रीय पैटर्न के रूप में उभर रहा है। भोपाल का ओरल कैंसर पैटर्न मिजोरम-मेघालय, ग्वालियर का गॉल ब्लैडर कैंसर गंगा बेल्ट और मालवा का पंजाब के कैंसर बेल्ट जैसा दिखता है। विंध्य-बुंदेलखंड में सर्वाइकल कैंसर के मामले ज्यादा हैं। इसलिए इस बार वर्ल्ड कैंसर डे की थीम यूनाइटेड फॉर यूनिक रखी गई है। यानी हर व्यक्ति को आसपास ही उसकी आवश्यकता के अनुरूप इलाज मिल सके। एम्स में विशेष सेंटर(कैप) शुरू किया गया है। यहां हर मरीज को उसकी प्रोफाइल के आधार पर इलाज मिलेगा, साथ ही रिसर्च होगी। डॉ. माधवानंद कर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट एवं डायरेक्टर , एम्स भोपाल भोपाल: ओरल कैंसर का हॉटस्पाट
भोपाल में पुरुषों में कैंसर के कुल मामलों में से 18-20% ओरल (मुंह) के हैं। ये संख्या लगातार बढ़ रही है। ‘गुल’ व तंबाकू रातभर मुंह में रखना यहां के क्लिनिकल पैटर्न को उत्तर-पूर्व भारत जैसा बना रहा है। अर्ली डायग्नोस: आइने में देखें। छाले हों या सेंसिटिविटी कम हो तो जांच कराएं। रोकथाम : गुटखा, सुपारी आदि न खाएं। ग्वालियर-चंबल: यूपी-बिहार जैसा
यहां ट्रेंड यूपी/बिहार की तरह है। यहां कैंसर रोगियों में गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) कैंसर का प्रतिशत राज्य के अन्य हिस्सों से 1.5 गुना अधिक है। पित्त की पथरी बेहद सामान्य है। पानी में हैवी मेटल्स वजह है। अर्ली डायग्नोस: हर 6 माह में खून जांच करें। परिवार में कैंसर है, तो जांच कराएं। रोकथाम : उपचारित-आरओ पानी पिएं। इंदौर: जीवनशैली ने दिया स्तन कैंसर
महिलाओं में स्तन कैंसर यहां कुल कैंसर केस का 30% है। शहरों में गतिहीन जीवनशैली से पुरुषों में आंत, महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर से औसत उम्र भी कम (35-45) हो रही है। अर्ली डायग्नोस : खुद देखें, स्तनों से खून या गांठ तो नहीं लग रही।
रोकथाम :गतिहीन जीवनशैली छोड़ें। मालवा में रासायनिक दुष्प्रभाव… पंजाब की तरह मालवा में भी कैंसर ‘केमिकल इंड्यूस्ड’ माना जा रहा है। यहां पेट और किडनी कैंसर के मामले पिछले 5 साल में 25% तक बढ़े हैं। अत्यधिक कीटनाशक और रसायनों का मिट्टी व जल स्रोत में मिलना इसकी वजह है। मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. श्याम अग्रवाल बताते हैं, अगर आप 40+ हैं या हाई-रिस्क इलाके में रहते हैं तो पेट का अल्ट्रासाउंड और किडनी फंक्शन टेस्ट कराएं।


