इंदौर पुलिस ने करीब 1 साल पहले कथित एमडी ड्रग को पकड़ा था, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई गई थी। इस मामले में 2 लोगों को आरोपी बनाया गया था। वहीं, एक पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई हुई थी। लेकिन अब जांच में पता चला कि पकड़ा गया पदार्थ असल में एमडी ड्रग नहीं यूरिया था। इस मामले में तेजाजी नगर में पुलिसकर्मी लखन गुप्ता को फंसाया गया था। इसमें तेजाजी नगर के सब-इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों ने विजय पाटीदार और मोहम्मद शाहनवाज को गिरफ्तार किया और फिर लखन गुप्ता पर कार्रवाई की। करीब तीन महीने पहले भोपाल की फॉरेंसिक लैब ने जांच की तो पता चला कि जो पदार्थ पकड़ा गया था, वह एमडी ड्रग नहीं बल्कि यूरिया था। फिर पुलिस ने हैदराबाद की लैब से री-टेस्टिंग करवाई, वहां भी यही रिपोर्ट आई। इसके बाद पुलिस ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। जिला कोर्ट के विशेष न्यायधीश के सामने तेजाजी नगर पुलिस ने माना कि विजय पाटीदार, मोहम्मद शाहनवाज, राजा (राजा बाबू) और आजाद नगर के मुंशी पुलिसकर्मी के खिलाफ जो 198 ग्राम एमडी ड्रग का मामला था, वह गलत था। कोर्ट ने मंगलवार को मामले की खारिजी स्वीकार कर ली है। 1 साल पहले शुरू हुआ मामला 26 फरवरी 2025 को थाने के सब इंस्पेक्टर मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेन्द्र परिहार, अभिनव शर्मा, आरक्षक गोविंदा, आरक्षक दिपेन्द्र राणा के साथ कंट्रोल रूम से वायरलेस पर सूचना मिलने पर संदिग्धों की चेकिंग करने के लिए एबी रोड बायपास पर कस्तूरबा ग्राम पहुंचे। यहां रोड किनारे दो व्यक्ति बाइक पर संदिग्ध अवस्था में बैठे दिखे थे। पुलिस वाहन को देखकर दोनों भागने लगे। पुलिस फोर्स की मदद से उन्हें पकड़ा गया तो उन्होंने अपना नाम विजय जिला मंदसौर और दूसरे ने मोहम्मद शाहनवाज निवासी आजाद नगर बताया। तलाशी लेने पर शाहनवाज की जेब से कुछ पाउडरनुमा संदिग्ध पदार्थ पाया गया था। मादक पदार्थ को बरामद कर पंचनामा बनाया, जिसमें 198 ग्राम अवैध एमडी ड्रग जिसकी कीमत 2 करोड़ रुपए बताकर पुलिस ने आरोपियों को धारा 8/22 के तहत गिरफ्तार कर लिया। आरोपी शाहनवाज के मेमोरेंडम के आधार पर आजाद नगर थाने के कोर्ट मुंशी लखन गुप्ता की उक्त अपराध में उसकी संलिप्तता और संरक्षण होना पाया। ड्रग्स मेफोड्रॉन वाणिज्यिक मात्रा 50 ग्राम से अधिक 198 ग्राम पाई गई। एमडी ड्रग नहीं, पोटेशियम नाइट्रेट पाया गया
तेजाजी नगर पुलिस ने संदिग्ध पदार्थ को फोरेंसिक लैब भोपाल भेजा, जिसमें मेफोड्रॉन या अन्य नारकोटिक्स नहीं पाए गए। इसके बजाय पोटेशियम नाइट्रेट मिला, जो आमतौर पर कृषि उर्वरक, पटाखे और टूथपेस्ट में पाया जाता है। एफएसएल रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने भोपाल राज्य की एफएसएल रिपोर्ट पर भरोसा न कर, री-टेस्टिंग के लिए केंद्रीय एफएसएल हैदराबाद भेजने की अनुमति जिला न्यायालय से मांगी। हैदराबाद की री-टेस्टिंग रिपोर्ट 9 दिसंबर 2025 को आई, जिसमें भी यूरिया पाया गया और किसी प्रकार का एमडी ड्रग या अन्य नारकोटिक्स नहीं मिला। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि एनडीपीएस की कोई भी धारा का अपराध घटित नहीं हुआ। कोर्ट ने आदेश दिया कि तेजाजी नगर पुलिस की ओर से खारिजी स्वीकार की जाए और सभी आरोपियों को उनके जब्त मोबाइल व सामान लौटाए जाएं। वर्तमान में सभी आरोपी जमानत पर हैं। एक्सपर्ट बोले- गलत आरोपित लोग हर्जाना मांग सकते हैं
हाई कोर्ट एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने बताया कि एनडीपीएस मामलों में वैज्ञानिक तकनीक अब कथित अनुभव पर कई सवाल खड़े कर देती है। अनुभव पर आधारित पुलिस कार्रवाई कभी भी फॉरेंसिक तकनीक की जगह नहीं ले सकती। ऐसे मामलों में गलत आरोपित लोग अनुच्छेद 226-227 के तहत राज्य शासन से उचित हर्जाना व क्षतिपूर्ति मांग सकते हैं और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। डॉक्टर एवं एडवोकेट रूपाली राठौर के अनुसार, एनडीपीएस मामलों में झूठे आरोपों से फंसे निर्दोषों के लिए धारा 58 सुरक्षा कवच का कार्य करती है। यह धारा पुलिस अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग, निजी दुश्मनी, रंजिश, प्रताड़ना, झूठी तलब, तलाशी और गिरफ्तारी के मामलों में दंड का प्रावधान करती है।


