अटल कुंज परियोजना के नए टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक:हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर युगल पीठ सख्त, जवाबदेही पर उठाए सवाल; आयुक्त से मांगा जबाव

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एमपी हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए डीडी नगर स्थित अटल कुंज रिहायशी परियोजना के नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिस अधिकारी की भूमिका को पूर्व आदेश में गड़बड़ी का मुख्य कारण बताया गया था, उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय किसी अन्य अधिकारी को निलंबित करना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि अतिरिक्त आयुक्त-I की भूमिका संदिग्ध होने के बावजूद जिम्मेदारी तय करने के बजाय ग्वालियर के कार्यपालन यंत्री को निलंबित कर दिया गया, जबकि वह वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहा था। इस पर कोर्ट ने असंतोष जताते हुए टिप्पणी की कि ऐसी कार्रवाई से जवाबदेही तय करने की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसी क्रम में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कार्यपालन यंत्री नीरू राजपूत के निलंबन आदेश पर भी रोक लगा दी है। उल्लेखनीय है कि डीडी नगर में लगभग 65 करोड़ रुपए की लागत से अटल कुंज रिहायशी कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी निविदा शर्तों में बार-बार बदलाव को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। पुनः टेंडर प्रक्रिया को दी गई चुनौती मामले में प्रैगमैटिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने पुनः टेंडर जारी करने की प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बोर्ड के अतिरिक्त आयुक्त (2) द्वारा 15 जनवरी 2026 को जारी आदेश में स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि पूर्व निविदा प्रक्रिया भ्रम और गलत निर्णयों के कारण दूषित हो गई थी। इसके बावजूद एल-1 बोलीदाता को ठेका देने या प्रक्रिया में सुधार करने के बजाय फ्रेश बिडिंग के निर्देश जारी कर दिए गए, जो न्यायोचित नहीं है। याचिकाकर्ता को नुकसान की आशंका याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नए टेंडर से उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति सार्वजनिक हो गई है, जिससे भविष्य की निविदाओं में उसे गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए कहा कि 16 अक्टूबर 2025 को पारित पूर्व आदेश में निविदा प्रक्रिया की अनियमितताओं और विसंगतियों को पहले ही विस्तार से रेखांकित किया जा चुका है। इसके बावजूद बोर्ड द्वारा समग्र और जिम्मेदाराना दृष्टिकोण अपनाने के बजाय सतही निर्णय लिया गया, जो स्वीकार्य नहीं है। बोर्ड को अगली सुनवाई तक रोक कोर्ट ने 15 जनवरी 2026 के विवादित आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि बोर्ड न्यायालय की अनुमति के बिना कोई भी आगे की कार्यवाही नहीं करेगा। साथ ही, हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त को शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि नया टेंडर जारी करना सार्वजनिक धन और संसाधनों के हित में कैसे उचित है।

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