जोश, जुनून और हिम्मत से लबरेज इंजी. बलवीर सिंह की वजह से सैकड़ों माता-बहनों के घरों में चूल्हा जलता है। वजह, निस्वार्थ भाव से दूसरों को रोजगार दिलाने का निरंतर प्रयास करना, जिन्होंने 2007 में कोटा की सबसे फेमस आईआईटी कोचिंग से 12 लाख का पैकेज छोड़ गायों को बचाने के लिए उनके गोबर से निर्मित सामान बना बेचने की तरकीब सोची। इसके साथ ही जरूरतमंद महिलाओं को इस मुहिम से जोड़कर उनको घर बैठे रोजगार दिलाने का रास्ता निकाला। आज सोशल वेलफेयर एंड रिसर्च ग्रुप ( स्वर्ग) संस्था के जरिए पूरे राजस्थान में नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में भी सैकड़ो महिलाएं गोबर से निर्मित सामान बेच रही हैं,जिससे वह गायों को पालने के साथ अपने बच्चों को भी बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं। इंजी. बलवीर ने राजस्थान की 600 महिलाओं को अकेले स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है। इसके लिए बालवीर को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से वर्ष 2021 में इंदिरा शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सड़कों पर गायों को पॉलीथिन खाता देखा तो उनकों बचाने के लिए गोबर और मूत्र पर रिसर्च किया परिवार के पहले इंजी बने बलवीर… मुखर्जी नगर निवासी 61 वर्षीय इंजी.बलवीर सिंह बताते हैं की बचपन से गरीबी देखी और यह जाना की गरीबी में किस तरीके से घर को चलाने के साथ शिक्षा प्राप्त का करना भी मुश्किल होता है। पिता खेती-बाड़ी का काम करते थे। दो भाई दो बहनों में सबसे ज्यादा होशियार थे। इसलिए आगरा दयालबाग यूनिवर्सिटी से वर्ष 1986 में बीएससी इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद वह अपने घर में पहले इंजीनियर बनें। बलवीर बताते हैं कि भरतपुर के सिमको बतौर इंजीनियरिंग का काम किया। इसके अलावा राष्ट्रीय महिला कोष में भी अपनी सेवा, जिसके बाद कोटा की बहुत ही फेमस कोचिंग में आईआईटी के बच्चों को मैथ्स पढ़ाना शुरू किया। स्वर्ग संस्था के संस्थापक बलवीर बताते हैं कि लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पाली गाय जब दूध देना बंद कर देती है तो उनको सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। गाय सड़कों पर आवारा पशु की तरह घूमती रहती है और पॉलीथिन खाती है। जिनको देखकर हमेशा मन दुखी होता था। उनकी दुर्दशा को देखकर यह रिसर्च मैंने की । इसके लिए कई राज्यों में गया। वहां उनसे जाना- सीखा की किस तरीके से गाय के गोबर से खिलौने, धूपबत्ती सामान बनाया जा सकता है। कोटा में गाय के गोबर से दीपक बनाने का प्रयास किया और लोगों ने तारीफ की। तब नौकरी छोड़ने का निश्चय किया। इसके बाद भरतपुर में 4-5 महिलाओं के सहयोग से गाय के गोबर से दीपक बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाने लगे। अब 150 से अधिक गोबर के प्रोडक्ट्स बनाते हैं। 600 महिलाएं आत्मनिर्भर, खुद का कर रहीं बिजनेस बलवीर की संस्था स्वर्ग के जरिए राजस्थान में 600 महिलाओं को रोजगार मिल रहा हैं। यह महिलाएं घर की पालतू गायों के गोबर से दीपक, पूजा की थाली, धूपबत्ती, लैंप, घड़ी, खिलौने आदि बना खुद ही बेचने का कार्य करती हैं। हर महिला महीने में कम से कम 5000 से लेकर 15000 रुपए तक कमा लेती हैं जिससे अपना घर का खर्चा चलाने के साथ गायों को भी पाल रही हैं।


