5 हजार पंचायतों में से 1550 में ही चालू:स्वच्छता परिसर में 140 करोड़ रुपए साफ; कहीं दबंगों का कब्जा, ​कहीं सूख रहे कंडे

प्रदेश के 18 जिलों से तस्वीर दतिया जिले की ग्राम पंचायत सीतापुर की है। यहां नदी के पास सामुदायिक स्वच्छता परिसर (शौचालय) बना है। 3.44 लाख की लागत से 2021 में बने इस स्वच्छता परिसर में न पानी की टंकी है, न नल कनेक्शन। हकीकत यह है कि​ स्वच्छता परिसर में 4 साल से ताला लगा है। इस परिसर का उपयोग ग्रामीण कंडे सुखाने के लिए कर रहे हैं। पंचायत सचिव लक्ष्मण कुशवाह का कहना है ​कि टंकी आंधी में उड़ गई थी, उसे मोहल्ले में रखवा दिया है। किसके यहां रखी है, नहीं पता। दरअसल, पंचायतों में बने सामुदायिक स्वच्छता परिसर जनता के पैसों की बर्बादी का जीता जागता उदाहरण है। भोपाल, ग्वालियर, सागर और नर्मदापुरम् संभाग के 18 जिलों की 5000 पंचायतों में 140 करोड़ रुपये खर्च कर ये परिसर बनाए गए। लेकिन अधिकतर बंद पड़े हैं। कुछ आबादी से दूर हैं, तो कुछ पर दबंगों का कब्जा है। 5100 परिसरों में सिर्फ 1550 चालू हैं। अशोकनगर में 200 में से एक भी चालू नहीं। दतिया में 104 में से सिर्फ एक चालू है। पंचायतों को सफाईकर्मी रखना था, लेकिन यह नहीं हुआ। 2020-21 में हर परिसर पर 3-4 लाख रुपए खर्च हुए थे। स्वच्छ भारत मिशन (मप्र) के डिप्टी कमिश्नर अजीत तिवारी ने कहा कि पानी की समस्या जल जीवन मिशन से हल होगी। सफाई के लिए 15वें वित्त आयोग से फंड जुटा रहे हैं। दबंगों का कब्जा जल्द हटवाएंगे। शिवपुरी… 4 साल से बंद, किसने ताला लगाया…एक दूसरे पर लगा रहे आरोप शिवपुरी जिले की कोलारस जनपद की सेसईखुर्द पंचायत में 2021 में 4 लाख की लागत से स्वच्छता परिसर बना, लेकिन यह कभी चालू नहीं हुआ। एक तरफ ताला लगा है, और गांव के छन्नू कुशवाह ने शौचालय पर कब्जा कर रखा है। उसने वहां अपना सामान रखा हुआ है। पंचायत सचिव श्रीलाल धाकड़ का कहना है कि कब्जा हटवाया गया था, लेकिन गांव में कोई शौचालय का उपयोग नहीं करता। सरपंच रामपाल यादव ने बताया कि छन्नू ने कब्जा कर लिया है। उन्होंने ताला लगाने से इंकार किया। सचिव का कहना है कि ताला सरपंच ने लगाया। टीकमगढ़… आबादी से दूर बनाया, पानी का इंतजाम भी नहीं, बनने के बाद से ही बंद जिले के बल्देवगढ़ ब्लॉक की करमासन हटा पंचायत में 2020-21 में 3.23 लाख की लागत से स्वच्छता परिसर बना। इसे आबादी से दूर उर नदी के करमासन घाट पुल के पास बनाया गया। पानी का स्रोत न होने से यह उपयोग में नहीं आ रहा। निर्माण के बाद से ही इस पर ताला लगा है। सरपंच नंदलाल लोधी ने बताया कि जलस्रोत और सफाई व्यवस्था न होने से परिसर अनुपयोगी है। अगर इसे खोला जाता है तो मंदिर के पास गंदगी फैलेगी। इसलिए निर्माण के बाद से ही यह बेकार पड़ा है। नर्मदापुरम्… 8 माह पहले आंधी में उड़ी टंकी अभी तक नहीं रखी, गांव से दूर बना दिया नर्मदापुरम जिले के गोरा गांव में स्वच्छता परिसर 8 माह से बंद है। यहां पानी की टंकी और बिजली नहीं है। गेट भी बंद रहते हैं। ग्रामीण फूल गिरि गोस्वामी ने बताया कि गांव से दूर बनाने के कारण इसका उपयोग नहीं हो रहा। सहायक सचिव सुनील मीना ने कहा कि गांव में जगह न होने से खेत में बनाना पड़ा। बांद्राभान गांव में स्वागत द्वार के पास बना स्वच्छता परिसर भी बेकार है। दरवाजे खुले हैं, लेकिन न पानी है न सीट। सरपंच लालता मलैया ने बताया कि तोड़फोड़ की वजह से रात में ताला लगाया जाता है।

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