रोपड़। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) रोपड़ के एआई इन-एग्रीकल्चर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एएनएनएएम एआई) ने किसानों को सीधे कृषि शोध और डिजिटल तकनीक से जोड़ने के लिए नई पहल ‘फार्मर्स फ्राइडे’ शुरू की है। इसका मकसद खेती से जुड़ी जमीनी समस्याओं को समझकर उनके व्यावहारिक समाधान तैयार करना है। यह पहल शिक्षा मंत्रालय के सहयोग और आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा के मार्गदर्शन में शुरू की। शुरुआत पहले आईआईटी रोपड़ कैंपस में बातचीत से हुई। इसके बाद रोपड़ जिले के बेली गांव में गांव-स्तरीय सत्र करवाया। फार्मर्स फ्राइडे की खास बात ये है कि इसमें पहले किसानों की समस्याएं सुनी जाती हैं। पारंपरिक तरीके के उलट, यह पहल किसानों की जरूरतों, अनुभवों और चुनौतियों को समझकर डिजिटल समाधान विकसित करने पर जोर देती है। मिट्टी, पानी, फसल चक्र, कीट-रोग, मौसम और बाजार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाती है। कैंपस में हुई पहली बातचीत में 40 से ज्यादा प्रगतिशील किसानों के साथ राज्य कृषि विभाग के अधिकारी और शोधकर्ता शामिल हुए। किसानों ने खेती के अपने अनुभव साझा किए। बेली गांव में हुए सत्र में 60 से अधिक किसानों ने मिट्टी की सेहत, पानी की उपलब्धता, बीज की गुणवत्ता, फसल रोग और बदलते मौसम जैसी समस्याओं पर चर्चा की। टीम ने बताया कि फार्मर्स फ्राइडे आगे भी आईआईटी रोपड़ और आसपास के गांवों में नियमित रूप से करवाया जाएगा।


