रायगड़ा/कोरापुट| लोकसभा में सरकार ने सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका को दिए गए लिखित जवाब ने एक बार फिर डिजिटल इंडिया के दावों की पोल खोल दी है। 31 दिसंबर 2025 तक कोरापुट और रायगड़ा जिलों के कुल 238 गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और 4जी इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि आदिवासी समाज के साथ हो रहे लगातार भेदभाव को भी उजागर करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कोरापुट जिले के 2,047 गांवों में से 89 और रायगड़ा जिले के 2,671 गांवों में से 149 गांव अब भी डिजिटल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। ये सभी गांव अधिकतर पहाड़ी, वनांचल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और प्रशासनिक सुविधाओं की भारी कमी है। अब सरकार की लापरवाही ने इन इलाकों को डिजिटल रूप से भी पीछे धकेल दिया है। डीबीएन योजना के तहत सैकड़ों मोबाइल टावर लगाने की घोषणा की गई थी, लेकिन सड़क सुविधा की कमी, ज़मीन आवंटन में देरी, वन व वन्यजीव स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमति के अभाव में कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन गांवों में आंशिक नेटवर्क मौजूद था, उन्हें योजना से बाहर कर दिया गया, जिससे उनकी स्थिति और खराब हो गई। सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी आज एक बुनियादी अधिकार है। सरकार को तुरंत ठोस समय-सीमा के साथ सभी वंचित गांवों में नेटवर्क सुविधा सुनिश्चित करनी चाहिए।


