भास्कर न्यूज|गिरिडीह/देवरी गिरिडीह जिला अवैध पत्थर कारोबारियों का गढ़ बनता जा रहा है। यहां वैध खदानों से 10 गुणा अवैध खदानें चल रही हैं। जिसकी लीज खत्म हो चुकी है वहां भी धड़ल्ले से खनन चल रहा है। धंधेबाजों को न जंगल से मतलब है न नदी से और न ही आबादी व खेत खलिहान से। मकसद सिर्फ अपनी जेब भरना है। ऐसा ही गोरखधंधा पिछले तीन सालों से देवरी अंचल के भेलवाघाटी थाना अंतर्गत चहाल में चल रहा है। यहां धंधेबाज ने क्वार्ट्ज व मोरम मिट्टी खनन के लिए मेसर्स गणपति मिनरल्स के नाम से लीज हासिल किया। लेकिन यहां से कभी क्वार्ट्ज पत्थर व मोरम मिट्टी खनन हुआ ही नहीं। क्योंकि, यहां काला पत्थर है। खनन विभाग को जब असलियत पता चला तो तत्काल यहां खनन पर रोक लगा दी गई है। बाद में कोडरमा के कुछ धंधेबाजों ने पुराने लीज होल्डर से सौदा किया और साठगांठ से माइंस को अपने कब्जे में ले लिया और साठगांठ से पिछले चार सालों से संचालित कर रहा है, और अभी यहां से प्रतिदिन 100 हाइवा से पत्थर की बिक्री हर दिन की जा रही है। स्थानीय लोगों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि इसकी लीज आवंटित है। विरोध करने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है। ताकि वह कभी आवाज नहीं उठा सकें।अभी हालात यह है कि चहाल व आसपास का कोई शख्स इन धंधेबाजों के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता है। कुछ लोगों ने हिम्मत कर आला अधिकारियों से इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लिहाजा माफिया बेखौफ इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। 12 एकड़ में काला पत्थर का भंडार, कागजों में खदान बंद फिर भी पांच एकड़ एरिया में किया जा रहा अवैध खनन जहां अवैध खनन हो रहा है, वहां करीब 12 एकड़ में काला पत्थर है, जिसमें अभी करीब 5 एकड़ एरिया में रात दिन पोपलेन व बुलडोजर से पत्थर खनन का चल रहा है। बड़े पैमाने पर काला पत्थर मिलने के बाद धंधेबाजों ने कई कुछ राजनीतिक सफेदपोश को भी शामिल कर रखा है, ताकि कार्रवाई से बच सकें। जबकि हकीकत है कि खनन विभाग की ओर से जारी सूची मंे मेसर्स गणपति मिनरल्स फिलहाल बंद है। बावजूद दिनदहाड़े विस्फोट कर यहां पत्थर तोड़ तस्करी की जा रही है। फिर पोकलेन से हाइवा में लादकर कोडरमा जिले के क्रशरों में खुलेआम भेजा जा रहा है। इस पर न तो स्थानीय अधिकारियों व पुलिस की नजर जा रही है और न ही जिले के खनन टास्क फोर्स की। कार्रवाई की जिम्मेवारी टास्क फोर्स की : डीएमओ डीएमओ सत्यजीत कुमार ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला में टास्क फोर्स का गठन हुआ है। जिसमें सारे अंचलाधिकारी व थाना प्रभारी भी शामिल हैं। ऐसे में कार्रवाई की जिम्मेवारी उनकी भी है। हर जगह डीएमओ व खनन विभाग के लोग नहीं जा सकते हैं। वैसे चहाल के मामले की जल्द जांच होगी। गांव की सड़क हो गई खराब माइंस की वास्तविक लीज सबिता देवी के नाम पर था। जबकि, इसका अभी संचालन कोडरमा जिले के रोमन और कुणाल नाम के दो लोग कर रहे हैं। हाइवा की वजह से गांव की सड़क पूरी तरह से खराब होती जा रही है, ग्रामीण विरोध भी कर चुके है, लेकिन पत्थर खनन करने वालों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ग्रामीणों का विरोध दब जाता है और रात से गांव के रास्ते से पत्थर देवरी के मुख्य रोड तक ले जाते हैं, उसके बाद कोडरमा और बिहार की ओर से भेज देते हैं। अवैध खनन से क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। खेतों की उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो रही है, भारी वाहनों से सड़कों पर धूल और प्रदूषण बढ़ा है। दिन-रात चलने वाली मशीनों की तेज आवाज से ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है।


