बीकानेर के पारंपरिक खाद्य उद्योगों को विस्तार देने की दिशा में एक अहम प्रस्ताव सामने आया है। बीकानेर जिला उद्योग संघ और फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड इंडस्ट्री (फोर्टी) ने जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि से मिलकर बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़े तिलम संघ परिसर में लघु खाद्य उद्योगों के लिए विशेष फूड जोन स्थापित करने की मांग रखी। उद्योग संगठनों का कहना है कि शहर के रिहायशी इलाकों में संचालित पापड़, भुजिया, बड़ी और नमकीन जैसे उत्पादों से जुड़े लघु उद्योगों को जगह की कमी और नियामकीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बीछवाल स्थित तिलम संघ की 1.32 लाख वर्गमीटर खाली पड़ी भूमि को उपयोग में लेकर नियोजित फूड जोन विकसित किया जा सकता है। उद्योग संघ अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पचीसिया, राजीव शर्मा और हनुमान झंवर ने बताया कि वर्ष 2002 से बंद इस परिसर में यदि 500 से 1000 वर्गमीटर के प्लॉट विकसित किए जाएं, तो लगभग 125 से 150 लघु इकाइयां स्थापित हो सकती हैं। इससे बिखरे हुए घरेलू व अर्ध-व्यावसायिक स्तर पर चल रहे खाद्य उद्योगों को व्यवस्थित औद्योगिक माहौल मिलेगा। प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि रीको लिमिटेड से भूमि संबंधी जानकारी लेकर इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए। उनका तर्क है कि यह पहल बीकानेर के विश्वप्रसिद्ध खाद्य उत्पादों के उत्पादन, ब्रांडिंग और निर्यात क्षमता को मजबूत करेगी। इसके फायदो को गिनाते हुए डीपी पचीसिया ने बताया कि लघु उद्योगों को वैध और सुरक्षित औद्योगिक स्थान मिलेगा। उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार हो सकेगा। प्रदूषण व स्वच्छता मानकों का बेहतर पालन तथा स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना, बीकानेर ब्रांड फूड प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़त है। खाली पड़ी जमीन से रोजगार की फैक्ट्री तक विशेषज्ञ मानते हैं कि फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर मॉडल छोटे उद्यमियों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। साझा कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, टेस्टिंग लैब और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलने से लागत घटती है और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ती है। तिलम संघ परिसर में फूड जोन बनने से बीकानेर का पारंपरिक स्वाद संगठित उद्योग का रूप ले सकता है, जो शहर की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा।


