जीवाजी विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से छात्र परेशान हैं। विश्वविद्यालय ने नए नियमों के तहत साल में दो बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने का दावा किया था। दिसंबर 2025 में नोटिफिकेशन जारी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक एक भी परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। नेट या प्रवेश परीक्षा? असमंजस बरकरार छात्रों में सबसे बड़ी उलझन इस बात को लेकर है कि पीएचडी प्रवेश केवल यूजीसी नेट के आधार पर होगा या प्रवेश परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को भी मौका मिलेगा। इस संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे छात्र लगातार यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। नेट स्कोर की वैधता खत्म होने का डर हाल ही में यूजीसी नेट पास करने वाले छात्रों के लिए यह मामला और गंभीर है, क्योंकि नेट स्कोर कार्ड केवल एक वर्ष तक मान्य रहता है। समय पर प्रवेश प्रक्रिया नहीं हुई तो छात्रों को दोबारा नेट परीक्षा देनी पड़ सकती है, जिससे उनका एक साल खराब होने का खतरा है। आंकड़ों के अनुसार सत्र 2025-26 से यूजीसी ने पीएचडी प्रवेश के लिए नेट को अनिवार्य कर दिया है। पिछले एक वर्ष में 300 से अधिक अभ्यर्थियों ने अलग-अलग श्रेणियों में नेट क्वालीफाई किया है। यदि इस सत्र में नेट पास उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाता है तो उनका एक साल बच सकता है। 2000 से ज्यादा अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना यदि प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है तो 2000 से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। विश्वविद्यालय ने कहा-जल्द तय होगा कार्यक्रम विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी विमलेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि परीक्षा को लेकर कुछ नए नियम सामने आए हैं, जिसके कारण देरी हुई है। जल्द ही प्रवेश परीक्षा समिति से चर्चा कर आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा।


