उज्जैन में 82 वर्षीय राम सिंह चौहान का देहदान किया गया। उन्होंने साल 2021 में आरडी गार्डी हॉस्पिटल में देहदान का पंजीकरण कराया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनके अंतिम निर्णय का सम्मान करते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ देहदान की प्रक्रिया पूरी की। परिजनों ने बताया कि राम सिंह चौहान को सांस लेने में तकलीफ के कारण बीती रात अवंति अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने कुछ दिनों में छुट्टी मिलने की बात कही थी, लेकिन देर रात उनका निधन हो गया। राम सिंह चौहान के पुत्र विजय सिंह चौहान ने बताया कि उनके पिता देहदान के अपने संकल्प पर दृढ़ थे। परिवार ने शुरुआत में उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे अपने निर्णय पर कायम रहे। वे महर्षि दधीचि द्वारा देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों के दान की पौराणिक कथा से प्रेरित थे। उनका मानना था कि शरीर का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए, न कि केवल दाह-संस्कार तक सीमित रहना। राम सिंह चौहान साल 2002 में उज्जैन के शासकीय अस्पताल से अकाउंट पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनके निधन के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद आरडी गार्डी हॉस्पिटल की टीम मौके पर पहुंची। धार्मिक रीति-रिवाज पूरे करने के बाद परिजनों ने अस्थियों को कंधा देकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया और देह को अस्पताल को दान किया। दिवंगत राम सिंह चौहान को मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया निर्देशों के तहत दिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए शरीर या अंग दान करने वाले दानदाताओं को सम्मान स्वरूप गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर रही है।


