रतलाम जिले के जावरा स्थित बिनौली गांव में नजूल की सरकारी जमीन को अपने नाम कराने की मांग को लेकर सूर्यवंशी समाज के लोगों ने 55 किमी का पैदल सफर तय किया। समाजजन बुधवार रात गांव से निकले और पुलिस-प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद खेतों के रास्ते गुरुवार दोपहर रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। समाज का कहना है कि जिस जमीन पर उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और रविदास मंदिर बनवाया है, वह उन्हें आवंटित की जाए। बिनौली गांव पिपलौदा तहसील में आता है। जमीन की मांग को लेकर बुधवार दोपहर समाजजनों ने गांव में धरना दिया था। जब कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, तो वे रात में ही रतलाम के लिए पैदल निकल पड़े। जावरा में एसडीएम सुनील जायसवाल और सीएसपी युवराजसिंह ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। गुरुवार सुबह नामली पहुंचने पर ग्रामीण एसडीओपी किशोर पाटनवाला और टीआई गायत्री सोनी ने उन्हें रोका। पुलिस ने समझाइश देकर कई लोगों को वाहनों में बैठाकर वापस गांव भेज दिया। इसके बावजूद 10 से 15 लोग पुलिस से छिपते हुए खेतों के रास्ते गुरुवार दोपहर करीब 3.30 बजे रतलाम कलेक्ट्रेट पहुंच गए। 35 साल पहले स्थापित की थी प्रतिमा समाजजनों ने बताया कि जिस सरकारी जमीन की वे मांग कर रहे हैं, वहां 30 से 35 साल पहले डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। वहां रविदास जी का मंदिर भी समाज ने ही बनवाया है। इसकी देखरेख और आयोजनों का पूरा खर्च सूर्यवंशी समाज ही उठाता है। उनका कहना है कि इस भूमि को समाज के नाम आवंटित किया जाए ताकि कोई अन्य जाति या समाज इस पर कब्जा न कर सके। अधिकारी बोले- प्रक्रिया से ही मिलेगी जमीन नामली में अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि सरकारी जमीन सीधे समाज के नाम नहीं की जा सकती। यदि भूमि लेनी है, तो ग्राम पंचायत से विधिवत ठहराव-प्रस्ताव पास कराकर आवंटन की मांग करनी होगी। प्रकरण कलेक्ट्रेट जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई के बाद अंतिम निर्णय कलेक्टर लेंगे। हालांकि, समाज के लोग इस बात पर अड़े रहे कि उन्हें जमीन आज और अभी समाज के नाम चाहिए। अध्यक्ष और सचिव की जांच की मांग कलेक्ट्रेट में नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें जमीन आवंटन के अलावा समाज के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव की जांच कर नई नियुक्ति की मांग भी की गई। समाज के विनोद रायकवार ने कहा, “जब प्रतिमा समाज ने स्थापित की, मंदिर भी समाजजनों द्वारा बनाया गया तो जमीन भी समाज की होना चाहिए। हम 55 किमी पैदल चलकर रतलाम पहुंचे हैं। रास्ते में हमें रोकने की भी कोशिश की। हम कलेक्टर से मिलकर जाएंगे।”


