चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-53 में बनने वाली हाउसिंग स्कीम को लेकर बड़ा फैसला लिया है। यहां अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) खुद मकान नहीं बनाएगा, बल्कि 9 एकड़ जमीन निजी बिल्डरों को नीलाम की जाएगी। यह पहली बार होगा जब सीएचबी अपनी स्कीम बनाने की जगह जमीन निजी डेवलपर को देगा। प्रशासन की इस योजना को प्रशासक की भी मंजूरी मिल चुकी है। अप्रैल से नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नीलामी के बाद निजी बिल्डर यहां बहुमंजिला इमारतें बनाएंगे, जो शहर की अब तक की सबसे ऊंची हाउसिंग इमारतें होंगी। पहले 372 फ्लैट बनाने की थी योजना पहले प्रशासन ने यहां 372 फ्लैट बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन लागत बहुत ज्यादा होने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। अब प्रशासन ने मल्टी स्टोरी बिल्डिंग और एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। अगर मंजूरी मिल जाती है तो निजी डेवलपर यहां हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाएगा और फ्लैट खुले बाजार में बेचेगा। प्रशासन का मानना है कि जितनी ऊंची इमारत बनेगी, उतने ही ज्यादा फ्लैट होंगे और कीमतें कम रहेंगी, जिससे लोगों को फायदा मिलेगा। सेक्टर-53 करीब 21 एकड़ जमीन में फैला है। इसमें से पहले 11 एकड़ जमीन यूटी कर्मचारियों की आवास योजना के लिए तय की गई थी। बाकी जमीन को नीलाम करने का प्रस्ताव था, जिसे अब मंजूरी दे दी गई है। नीलामी से पहले यूटी के चीफ आर्किटेक्ट द्वारा जोनिंग प्लान को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि सभी नियमों के अनुसार प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके। जानिए क्यों पीछे हटा CHB सीएचबी ने खुद हाउसिंग स्कीम लाने का फैसला इसलिए छोड़ा क्योंकि फ्लैटों की कीमतें बहुत ज्यादा आ रही थीं। प्रस्तावित योजना के तहत तीन बेडरूम फ्लैट की कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये, दो बेडरूम फ्लैट की कीमत करीब 1.97 करोड़ रुपये और ईडब्ल्यूएस फ्लैट की कीमत लगभग 74 लाख रुपये तय की गई थी। इसके अलावा अप्रैल से कलेक्टर रेट में 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे फ्लैट और महंगे हो जाते। इसी वजह से इस स्कीम को किफायती नहीं माना गया और प्रशासन ने इसे निजी बिल्डरों को देने का फैसला लिया। सेक्टर-53 की यह हाउसिंग योजना पिछले करीब 10 साल से अटकी हुई थी, लेकिन नए फैसले के बाद अब इसके शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।


