ईश्वर धन की मात्रा नहीं, बल्कि उन्हें अर्पित करने वाले के भाव देखते हैं: रविनंदन शास्त्री

भास्कर न्यूज | लुधियाना अनंत विभूति 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वेद भारती महाराज के सान्निध्य में आयोजित 49वें विराट धर्म सम्मेलन-महायज्ञ ने भक्ति का अनूठा रंग बिखेरा है। कार्यक्रम के तीसरे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा में सैकडों श्रद्धालु पहुंचे। कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने अपनी ओजस्वी वाणी से शुकदेव मुनि और राजा परीक्षित के मिलन सहित ध्रुव चरित्र का हृदयस्पर्शी वृत्तांत सुनाया। कथा व्यास ने धन की शुद्धता पर जोर देते हुए कहा कि दिखावे के लिए किया गया दान केवल अहंकार बढ़ाता है और धन का नाश करता है। इसके विपरीत सात्विक मार्ग और मेहनत की नेक कमाई से एकत्रित किया गया धन जब श्रद्धा के साथ धर्म कार्यों में लगाया जाता है, तो वह मनुष्य का परलोक संवारने में सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर धन की मात्रा नहीं, बल्कि उन्हें अर्पित करने वाले के भाव देखते हैं। कथा के दौरान कलयुग के आगमन का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शास्त्री ने बताया कि कलयुग ने जब राजा परीक्षित के शासनकाल में प्रवेश की अनुमति मांगी तो राजा ने उसे पांच स्थान दिए। लेकिन जैसे ही परीक्षित ने सोने का मुकुट धारण किया कलयुग उसमें जा बैठा। मुकुट के माध्यम से कलयुग ने राजा की बुद्धि को प्रभावित कर सात्विक राज्य में अपनी पैठ बना ली। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि अधर्म किसी भी रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर सकता है, जिसके प्रति सदैव सतर्क रहना चाहिए। समारोह का शुभारंभ नवल किशोर द्वारा गुरु गद्दी पूजन और मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। फूला डाबर, रमन जैन और ज्योति परिवार सहित अनेक गणमान्य जनों ने ध्वजारोहण कर धर्म ध्वजा को नमन किया। स्वामी प्रिया भारती व अन्य सन्यासियों ने श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केवल सौभाग्यशाली जीव को ही भागवत श्रवण का अवसर मिलता है। सुंदर दास मोंगा, साहिल खुराना और नरेश बांसल सहित भारी संख्या में उपस्थित भक्तों ने आरती के साथ तीसरे दिन की कथा को विश्राम दिया।

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