भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिला सरपंच संघ ने अपनी 8 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई है। सरपंचों ने डीएमएफ मद से मेडिकल कॉलेज का निर्माण होने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे गांवों में विकास कार्य रूक गए हैं। सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र भास्कर ने कहा कि ग्राम पंचायतों से जुड़ी समस्याओं को लेकर पूर्व कलेक्टर कुणाल दुदावत से कई बार मुलाकात की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। पिछले एक वर्ष से पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है, जिससे ग्रामीण विकास कार्य ठप पड़े हैं। सरपंच संघ ने जिला प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि मेडिकल कॉलेज निर्माण में खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। जबकि मेडिकल कॉलेज दंतेवाड़ा सहित तीन अन्य जिलों में भी केंद्र एवं राज्य सरकार की मदद से बनाए गए हैं, तो फिर दंतेवाड़ा के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। सरपंचों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज निर्माण के नाम पर फंड नहीं होने का हवाला सीईओ जिला पंचायत जयंत नाहटा द्वारा भी दिया गया, लेकिन केंद्र और राज्य से प्राप्त राशि कहां खर्च की गई, इसका स्पष्ट जवाब प्रशासन को देना चाहिए। सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्राम सरपंच उपस्थित रहे। ज्ञापन में सरपंच संघ ने मांग की है कि जिले की सभी 169 ग्राम पंचायतों को 20 से 30 लाख रुपये तक के निर्माण कार्य तत्काल स्वीकृत किए जाएं। साथ ही वर्ष 2021-22 में घोषित मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए प्राप्त राशि की जानकारी सार्वजनिक की जाए। सभी पहुंचविहीन वार्डों में मिट्टी-मुरूम सड़क निर्माण, किसानों को तार फेंसिंग एवं बोर खनन में अधिकतम 10 प्रतिशत अंश राशि, प्रत्येक पंचायत में सिंचाई एवं जल संरक्षण सर्वे कर तालाब, डबरी व बड़े जलाशयों की स्वीकृति, पुराने डेमों एवं तालाबों का जीर्णोद्धार, पंचायतों को देय मूलभूत राशि बिना कटौती देने तथा सरपंचों का मानदेय 20 हजार और वार्ड पंचों का मानदेय 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है।


