खेती-बाड़ी विभाग की टीम ने गांव रानके में स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री पर छापेमारी कर 45 किलो वजन वाले एग्रीकल्चर यूरिया के कुल 26 भरे बैग और 11 खाली बैग बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि बैगों पर भारत सरकार की मोहर लगी हुई थी और इस यूरिया का इस्तेमाल सिर्फ खेती-बाड़ी के लिए उपयोग लिखा था। खाली बैग मिलने से यह भी स्पष्ट हुआ कि यूरिया का पहले भी औद्योगिक इस्तेमाल किया जा चुका है। यूरिया का इस्तेमाल प्लाईवुड को चिपकाने के लिए किया जा रहा था। एग्रीकल्चर विभाग की टीम ने तुरंत मुल्लापुर दाखा थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर एएसआई नरेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। पूरी कार्रवाई का नेतृत्व खेती-बाड़ी विकास अधिकारी अर्शदीप सिंह ने किया। उनके साथ माछीवाड़ा के खेती-बाड़ी अधिकारी रमिंद्र सिंह और सिधवां बेट के खेती-बाड़ी विकास अधिकारी हर्ष कुमार भी मौजूद थे। खेती में इस्तेमाल यूरिया का हो रहा इंडस्ट्रियल यूज प्लाईवुड इंड्रस्ट्री में यूरिया का उपयोग प्लाईवुड जोड़ने के लिए रेजर बनाने में किया जाता है। जिसमें इंडस्ट्रियल ग्रेड यूरिया का उपयोग किया जाता है। जबकि यहां फैक्ट्री में एग्रीकल्चर ग्रेड यूरिया का उपयोग किया जा रहा था। जो किसानों को सब्सिडी पर मिलती है। पुलिस ने प्लाईवुड फैक्ट्री से मिली यूरिया की सभी 45 बोरियां विभाग विभाग की तरफ से सील कर दी गई है। जबकि फैक्ट्री पर इंड्रस्ट्री विभाग और पॉल्यूशन विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन इस पर कार्रवाई खेती बाड़ी विभाग ने की। मालिक ने पठानकोट की महिला को आगे किराये पर दे रखी थी फैक्ट्री पुलिस और विभागीय अधिकारियों ने आर्या इंडस्ट्री के मालिक रोहित कुमार पुत्र सतीश कुमार निवासी शेर-ए-पंजाब कॉलोनी, बडेवाल रोड, लुधियाना से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा। तब वह थाने पहुंचा और पुलिस को 10 पन्नों का एक रेंट एग्रीमेंट दिया। रेंट एग्रीमेंट 6 जनवरी 2026 को नोटरी से अटेस्टेड था। जिसमें करीब 50 से अधिक शर्तें दर्ज थीं। रेंट एग्रीमेंट के अनुसार, रोहित कुमार ने यह फैक्ट्री जनवरी 2026 को लिखित समझौते के तहत पठानकोट जिले के गांव अख्वाना की रहने वाली प्रियंका महाजन प|ी वरुण महाजन को चलाने के लिए किराए पर दी थी। रेंट एग्रीमेंट और मौके से मिली सामग्री के आधार पर पुलिस ने फैक्ट्री के संचालन की जिम्मेदारी प्रियंका महाजन पर मानते हुए उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में दो से तीन अज्ञात व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। जिसकी जांच की जा रही है। बड़ा सवाल…किसने दिलाई यूरिया सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि आखिरकार 11 क्विंटल से ज्यादा यूरिया प्लाईवुड फैक्ट्री संचालक को किसने उपलब्ध करवाया। अगर पुलिस इस मामले की तरीके से जांच करें तो इसमें कई और सफेदपोश भी सामने आ सकते हैं जो किसानों के हकों पर डाका मार कर सरकारी यूरिया की मार्केट में ब्लैक कर रहे है।


