कांटाबांजी| संसद के चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यसभा सांसद निरंजन बिशी ने पश्चिमी ओडिशा से हो रहे बड़े पैमाने पर श्रम पलायन का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने श्रम व रोजगार मंत्रालय से एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से जानना चाहा कि क्या सरकार ने पश्चिमी ओडिशा के जिलों से अन्य राज्यों में होने वाले पलायन पर कोई जिला-वार अध्ययन किया है, इसके मुख्य कारण क्या हैं, और इस संकट को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रश्न के उत्तर में श्रम व रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए इंटर-स्टेट माइग्रेंट वर्कमैन एक्ट, 1979 को ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 में समाहित किया गया है। इसके तहत प्रवासी श्रमिकों के लिए बेहतर कार्य स्थितियां, न्यूनतम मजदूरी, शिकायत निवारण तंत्र, टोल-फ्री हेल्पलाइन, यात्रा भत्ता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मंत्री ने यह भी बताया कि ओएसएच कोड के अंतर्गत नियोक्ताओं और ठेकेदारों के लिए प्रवासी मजदूरों को जैसे सभी वैधानिक लाभ देना अनिवार्य है, साथ ही दुर्घटना की स्थिति में संबंधित राज्य अधिकारियों और मजदूर के परिवार को सूचित करना भी जरूरी है। इसके अतिरिक्त, वेज कोड 2019 के तहत केंद्र और राज्य सरकारें नियमित रूप से न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा और संशोधन कर रही हैं। पलायन रोकने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न रोजगार योजनाएं चला रही है, जिनमें पीएम मुद्रा योजना, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम शामिल हैं।


