बच्चों में गीत, कहानी, खेल से बढ़ा सकते हैं सोच

भास्कर न्यूज़ | बेमेतरा डाइट में संचालित द्वितीय चरण के बालवाड़ी प्रशिक्षण के दूसरे दिवस का आयोजन शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों के साथ किया गया। प्रशिक्षण की शुरुआत कारेसरा की शिक्षिकाएं मिथिला अहिरवार, कामती ठाकुर एवं गोपेश्वरी साहू द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। अमोरा के शिक्षक श्यामकुमार सोनी ने गीत प्रस्तुत कर वातावरण को सकारात्मक बनाया। प्रतिवेदन वाचन मोहलई स्कूल की शिक्षिका लक्ष्मी साहू ने किया। प्राचार्य जेके घृतलहरे ने कहा कि गीत, कहानी और खेलों के माध्यम से नन्हे बच्चों में भाषा, सोच और रचनात्मकता का बेहतर विकास किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बाल्यावस्था बच्चों के समग्र विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है। जिले में कुल 347 बालवाड़ियां संचालित हैं, जिनमें से दो चरणों के प्रशिक्षण के बाद भी 96 बालवाड़ी शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रशिक्षण से वंचित रह गई हैं। इन्हीं शिक्षकों के लिए 9 से 11 फरवरी तक तृतीय चरण का प्रशिक्षण डाइट बेमेतरा में आयोजित किया जाएगा। इसमें शामिल होना अनिवार्य होगा, जिसके लिए सभी विकासखंडों के बीईओ एवं बीआरसी को पत्र जारी कर दिए गए हैं। शिक्षा नीति 2020 की विस्तार से जानकारी दी रिसोर्स पर्सन साकेत बिहारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। बताया कि बालवाड़ी के अंतर्गत 5 से 6 वर्ष के बच्चों को कक्षा पहली के लिए तैयार करना मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने ईसीसीई, एफएलएन, 5+3+3+4 शैक्षणिक ढांचे की विस्तार से जानकारी दी । बताया कि छह वर्ष की आयु तक बच्चों के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास हो जाता है। विधि शर्मा ने खेलों के माध्यम से अधिगम शैलियों श्रवण, दृष्टि और करके सीखने की जानकारी दी।

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