जल संरक्षण की वैज्ञानिक दृष्टिकोण व्यावहारिक उपाय की जानकारी दी

भास्कर न्यूज़ | बेमेतरा जिला पंचायत सभाकक्ष में भूमि जल संरक्षण विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला हुई। यह आयोजन निर्मित एवं निर्माणाधीन जल संरक्षण संरचनाओं की उचित स्थल पहचान, तकनीकी गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए केंद्रीय जल बोर्ड, उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक एवं उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा गिरते भू-जल स्तर के कारण जिले को क्रिटिकल श्रेणी में चिह्नांकित किया गया है। इसका सीधा असर सिंचाई व्यवस्था और पेयजल उपलब्धता पर पड़ रहा है। बढ़ते जल संकट से निपटने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। कार्यशाला में जिला स्तरीय अधिकारी, विकासखंड स्तर के मनरेगा अधिकारी एवं कर्मचारी, तकनीकी अमला तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को जल संरक्षण के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यवहारिक उपायों और तकनीकी मानकों से अवगत कराना था, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। प्रशिक्षण सत्र के दौरान जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, वर्षा जल संरक्षण, जल संरचनाओं की डिजाइन, निर्माण में तकनीकी सावधानियां, स्थानीय भू-भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जल प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से निर्मित संरचनाएं लंबे समय तक भू-जल स्तर को स्थिर रखने में सहायक होती हैं। समन्वित प्रयास पर जोर कार्यक्रम में जल संरक्षण से होने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ की जानकारी दी। जिले में जल संकट से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, प्रदान संस्था तथा जनपद पंचायतों के अधिकारी, सरपंच एवं रोजगार सहायक उपस्थित रहे। यह कार्यशाला जिले में स्थायी जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

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