भास्कर न्यूज | राउरकेला शहर में सड़क किनारे, पार्कों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बनाए गए पब्लिक शौचालय अब आम लोगों के लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं। प्रत्येक शौचालय पर करीब 2 लाख 75 हजार रुपए खर्च किए गए, जबकि शहर के लगभग 200 स्थानों पर यह निर्माण कराया गया। कुल मिलाकर 5 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद यह परियोजना पूरी तरह विफल साबित हुई है। डीएवी चौक और उत्कल मणि गोपबंधु यांत्रिक प्रतिष्ठान (यूजीआई) जैसे प्रमुख स्थानों पर बने शौचालय भी उपयोग लायक नहीं हैं। अधिकांश स्थानों पर निर्माण अधूरा है। आरोप है कि संबंधित ठेकेदार कंपनी ने आधा-अधूरा काम कर बिल उठा लिया और परियोजना छोड़ दी। यह योजना पिछली सरकार के दौरान मुख्यमंत्री के कर्म तत्पर अभियान (मुक्ता) के तहत शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य शहर में स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाना था। अधिकांश शौचालयों में नियमित जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके कारण पुरुष और महिला दोनों के लिए शौचालय का उपयोग मुश्किल हो गया है। डोंगा छक के जेल रोड, पानपोष स्वशासी कॉलेज परिसर और सिविल टाउनशिप पार्क में बने शौचालय कई महीनों से अधूरे या बंद पड़े हैं। सिर्फ चार स्थानों पर ही उपयोग योग्य शहर में बनाए गए 200 शौचालयों में से केवल चार स्थानों पर ही शौचालय पूरी तरह कार्यरत पाए गए हैं। बाकी सभी या तो अधूरे हैं या पूरी तरह बंद हैं। राउरकेला नगर निगम (आरएमसी) के अनुसार निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को दी गई थी। हालांकि गुणवत्ता और निगरानी पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं रखा गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि अधिकांश शौचालय अनुपयोगी हो चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि योजना में सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है और इसमें स्वार्थ जुड़े होने की आशंका भी है। मुक्ता योजना के तहत तालाब पुनरुद्धार और वर्षा जल संरक्षण जैसी परियोजनाओं में भी लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन उनमें से कई अधूरे या बेहद निम्न स्तर के बने हैं।


