ईश्वर को कर्म, ज्ञान व भक्ति से प्राप्त कर सकते हैं: श्रीश्वरी

नटवर स्कूल में चल रहे चौदह दिवसीय प्रवचन में वृंदावन से पधारी श्रीश्वरी देवी ने ईश्वर–प्राप्ति के तीन प्रमुख मार्गों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मानव जीवन में भले ही भौतिक प्रगति निरंतर हो रही हो, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से ईश्वर प्राप्ति के अनादिकाल से केवल तीन मार्ग ही प्रचलित हैं – कर्म, ज्ञान और भक्ति। श्रीश्वरी देवी ने कहा कि कभी-कभी लोग सोचते हैं कि चौथा मार्ग भी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। प्रकृति और विज्ञान के नियमों के विपरीत आध्यात्मिक मार्ग नहीं होते। उन्होंने व्याख्यान में स्पष्ट किया कि वेद, शास्त्र और पुराण इन तीनों मार्गों का प्रतिपादन करते हैं। कर्म मार्ग में सतब्रह्म की शक्ति का स्वभाविक ज्ञान मिलता है, ज्ञान मार्ग चितब्रह्म की शक्ति से जुड़ा होता है, जबकि भक्ति मार्ग आनंदब्रह्म की शक्ति और प्रेम के स्वभाव का परिचायक है। इस दौरान उन्होंने बताया कि प्रत्येक जीव में तीन प्रकार के स्वभाव हो सकते हैं – कर्म, ज्ञान और भक्ति। चूंकि चौथा स्वभाव या चौथा मार्ग अस्तित्व में नहीं है, इसलिए ईश्वर प्राप्ति के लिए केवल यही तीन मार्ग प्रभावी हैं। प्रवचन के दौरान प्रचारिका ने प्रत्येक मार्ग पर गंभीर विचार करने और जीवन में उनका अभ्यास करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस व्याख्यान को ध्यानपूर्वक सुना और व्यक्तिगत जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान विभिन्न उदाहरणों और पुराणिक कथाओं के माध्यम से यह समझाया गया कि किस प्रकार कर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलकर व्यक्ति ईश्वर के निकट पहुंच सकता है। प्रवचन का समापन शुक्रवार को होगा। इस अवसर पर वृंदावन की झांकी, फूलों की होली और महाआरती का विशेष आयोजन किया जाएगा। नगरवासियों से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्रवचन स्थल पर पधारें और इस दिव्य अनुभव का लाभ उठाएं। अंतिम दिन का यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देगा, बल्कि श्रद्धालुओं को ईश्वर के प्रति भक्ति और प्रेम के मार्ग को आत्मसात करने का सुअवसर प्रदान करेगा। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस चौदह दिवसीय प्रवचन ने जीवन को दिशा देने का काम किया है। प्रवचन में भाग लेकर उन्हें कर्म, ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, व्यवस्थापन और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालु पूरी शांति और भक्ति भाव से प्रवचन का आनंद ले सकें। प्रवचन समिति ने अंतिम दिन के विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी नगरवासियों से आमंत्रण दिया है, ताकि वे इस दिव्य अवसर का लाभ उठाकर अपने जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बना सकें।

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