गोवर्धनपुर पुल को जर्जर घोषित किए जाने के बाद सालभर से इस पर आवाजाही प्रतिबंधित है। सात बार टेंडर के बाद भी कोई ठेकेदार काम लेने को तैयार नहीं है। अब भारी वाहनों को शहर के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। प्लांट की दूरी बढ़ने से निजी उद्योग संचालक और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। निजी उद्योग संचालकों ने जिला प्रशासन से पुल की मरम्मत कराने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। मरम्मत के बाद पुल की टेस्टिंग की जाएगी और सब कुछ सही पाए जाने पर ही दोबारा परिवहन शुरू होगा। गोवर्धनपुर केलो नदी पर 2010 में बना पुल देख-रेख के अभाव में समय से पहले ही जर्जर हो गया है। पुल के जर्जर होने से ज्यादातर वाहन शहर से होकर हमीरपुर के रास्ते प्लांट तक आना-जाना कर रहे हैं। इससे उन्हें प्लांट तक जाने के लिए 50–60 किमी हमीरपुर से पूंजीपथरा होकर नेशनल हाईवे-49 तक घुमना पड़ता है। हालांकि क्षेत्रवासियों ने पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से राहत की सांस ली थी। भारी वाहनों को शहर से होकर आना-जाना पड़ रहा था, जिससे प्लांट की दूरी बढ़ गई थी। इससे परेशान निजी उद्योग संचालकों ने नदी के एक हिस्से में मिट्टी डालकर भारी वाहनों के गुजरने के लिए रपटा बना दिया था। क्षेत्रवासियों ने इसका विरोध कर सड़क बनाने की मांग की। बारिश में यह रपटा भी बह गया। सड़क बनाने के लिए मौके पर सरकारी जमीन नहीं है। निजी जमीन के कारण सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। इधर गोवर्धनपुर पुल से भारी वाहन नहीं गुजर पाने से उद्योग और ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। अब जिला प्रशासन की स्वीकृति के बाद निजी उद्योग संचालकों ने अपने खर्च पर मरम्मत शुरू कराई है। पिछले 15 दिन से पुल की मरम्मत का काम जारी है। पुल के 6 ब्रेकर ज्वाइंट बदले जाएंगे पुल की मरम्मत कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि पुल पर कंपन नहीं हो रहा है। इसमें 6 ब्रेकर ज्वाइंट है। इसके नीचे ब्रेरिंग होती है, जो खराब हो चुकी है। इसे निकालकर बदला जाएगा। इससे भारी वाहनों के चलने से कोठी (पिल्हर) पर असर नहीं होगा और पुल की अवधि बढ़ जाएगी। हांलाकि जब तक पीडब्ल्यूडी से सर्टीफिकेशन नहीं देगा, तब तक आवागमन शुरू नहीं होगा। सशर्त मरम्मत करने दी है अनुमति गोवर्धनपुर पुल की मरम्मत के लिए बजट के बावजूद ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। सड़क बंद होने से परेशानी हो रही है। निजी उद्योगों ने अपने खर्च पर मरम्मत कराने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सशर्त अनुमति दी है। टेस्टिंग के बाद ही वाहनों की आवाजाही की अनुमति देंगे। नए पुल निर्माण की भी तैयारी है। मयंक चतुर्वेदी, कलेक्टर, रायगढ़ दो दशक से सड़क की मांग, सिर्फ 400 मीटर जमीन का अधिग्रहण बाकी दो दशक से आठ कॉलोनी सहित छह गांव के लोग गोवर्धनपुर पर सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। विरोध, ज्ञापन, चक्काजाम सहित लाठीजार्च तक सड़क की मांग को लेकर किया जा चुका है। शालिनी स्कूल से गोवर्धनुपर तक सड़क बनाने 4 करोड़ 12 लाख रुपए का बजट मिला था। यहां 400 मीटर सड़क निजी जमीन है। प्रशासन इस सड़क का अधिग्रहण अब तक नहीं कर सका है। इस सड़क पर भारी वाहनों की चपेट में आने अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है।


