रांची नगर निगम चुनाव में शुक्रवार का दिन बेहद अहम साबित होने जा रहा है। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि होने के कारण शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। एक ही पार्टी के नेता-कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ ताल ठोंकते नजर आ रहे हैं। विरोध को देखते हुए झामुमो और कांग्रेस ने कई जगहों पर समर्थन की घोषणा ही नहीं की। बड़ी संख्या में अन्य प्रत्याशियों ने भी पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल किया है, लेकिन अब असली तस्वीर आज साफ होगी कि कौन मैदान में डटा रहेगा और कौन रणनीतिक रूप से पीछे हटेगा। इसके लिए अलग-अलग वार्डों में मान-मनौव्वल का दौर चरम पर है। सभी पार्टियां अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे पार्टी नेताओं को बिठाने की कोशिश शुरू कर दी है। क्योंकि पार्टी की रणनीति थी कि एक ही प्रत्याशी को समर्थन देकर चुनाव मैदान में उतारा जाए।। एक ही पार्टी से कई उम्मीदवार मैदान में सभी नौ नगर निगम में समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ उसी पार्टी के कई उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं। नामांकन के अंतिम दिन धनबाद में पूर्व विधायक संजीव सिंह ने पर्चा भरा। वहीं दिवंगत पूर्व मंत्री समरेश सिंह की बहू भी चास नगर निगम में पार्टी लाइन से अलग हटते हुए समर्थित उम्मीदवार अविनाश कुमार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर चुकी है। वहीं रांची से भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो ने भी नामांकन दाखिल किया। रांची समेत आदित्यपुर, मेदिनीनगर और धनबाद नगर निगम भाजपा के लिए सर्वाधिक चिंता का क्षेत्र है, जहां पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ भाजपा के ही कई नेता चुनाव मैदान में हैं। आदित्यपुर में भाजपा के जितने भी दावेदार थे, सबने पर्चा भर दिया है। इसी प्रकार देवघर में भाजपा के सिर्फ दो ही दावेदार थे, पर जैसे ही रीता चौरसिया को भाजपा ने समर्थन दिया, समर्थन की बाट जोह रहे दूसरे प्रत्याशी बाबा बलियासे ने नामांकन भर दिया। झामुमो ने रांची नगर निगम क्षेत्र में अब तक अपने किसी भी नेता को समर्थन नहीं दिया है। ऐसे में यहां पर पार्टी के आधा दर्जन से अधिक नेताओं ने नामांकन पत्र भर दिया है।


