अजमेर | आरपीएससी के स्टेनोग्राफर को फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाने में सबसे बड़ा मददगार मामले का तीसरा आरोपी गुरुवार को पुलिस के हत्थे चढ़ा है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी जयपुर निवासी मनीष उर्फ मोटूराम ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। मोटूराम अजमेर के जेएलएन अस्पताल के रैनबसेरे में काम करता था। उसने न केवल आरपीएससी के स्टेनोग्राफर अरुण शर्मा बल्कि 20 से ज्यादा लोगों को फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र बनवाकर दिए हैं। इसके लिए हर आवेदक से 5 से 20 हजार रुपए तक वसूल करने की बात भी प्रारंभिक पूछताछ में कबूल की है। सिविल लाइंस थाने के एएसआई गिरिराज कुमार के मुताबिक फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाकर आरपीएससी में नौकरी कर रहे अरुण शर्मा के बाद पुलिस ने डेगाना निवासी ई-मित्र संचालक राम निवास को गिरफ्तार किया था। अब तक की पूछताछ में उसने जो कुछ बताया है उसकी तस्दीक की जानी बाकी है। पूरे मामले में और लोगों के शामिल होने का संदेह है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी मनीष उर्फ मोटूराम ने बताया है कि उसकी अस्पताल के ही एक कार्मिक से दोस्ती हो गई थी। इसके बाद उन्होंने धीरे धीरे फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने का काम शुरू किया। 2007 के बाद भी वह यह काम करता रहा है। पुलिस को संदेह है कि मोटूराम की मदद कई और लोग भी कर रहे होंगे।


