हिरणमगरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह मजदूरी करने जा रहे श्रमिक पर तीन बदमाशों ने लूट की नीयत से चाकू से हमला कर हत्या कर दिया। थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि विजय सिंह पथिक नगर स्थित कच्ची बस्ती निवासी प्रेम गमेती (35) गुरुवार सुबह 4 बजे मजदूरी करने कृषि मंडी जा रहे थे। रास्ते में सेक्टर-8 रेलवे लाइन के पास तीन बदमाश उन्हें रोककर लूटपाट करने लगे। विरोध करने पर बदमाशों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। उनकी पीठ और सीने पर गंभीर घाव लगे। शोर मचाने पर तीनों बदमाश भाग गए। परिजन और स्थानीय लोगों ने उन्हें सेटेलाइट हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां से एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। सुबह करीब 8 बजे उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने दिनभर हॉस्पिटल में मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने डॉक्टर को सस्पेंड करने, आर्थिक सहायता और परिवार के सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की मांग की। मांगे पूरी नहीं होने पर देर शाम तक शव नहीं लिया। चाकूबाज: इन्होंने चंद पैसों के लिए चाकुओं से गोद डाला… मामले में बड़ा सवाल यह है कि श्रमिक की हत्या का जिम्मेदार कौन है? परिजनों ने चिकित्सकों और पुलिस को मौत का जिम्मेदार बताया है। उनका आरोप है कि चाकूबाजी के बाद वे घायल प्रेम गमेती का इलाज कराने एमबी हॉस्पिटल ले गए थे, लेकिन डॉक्टरों ने घाव पर टांके व पट्टी लगाकर भेज दिया। डॉक्टरों ने कहा कि आगे के इलाज के लिए पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराकर आओ। इसके बाद परिजन सवीना थाने गए। वहां पुलिसकर्मियों ने रिपोर्ट दर्ज करने में एक घंटा लगा दिया। इस दौरान घायल बाहर एंबुलेंस में जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। वहां से वापस हॉस्पिटल ले जाते हुए घायल बेहोश हो गया। फिर सुबह 8 बजे उसकी मौत हो गई। पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि जान बचाना चिकित्सकों की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने लापरवाही कर पहले रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा। जबकि, सूचना देने पर पुलिस खुद हॉस्पिटल आकर रिपोर्ट दर्ज करती है। पहले इलाज क्यों नहीं किया गया? थाने में क्यों भेजा? और श्रमिक वहां गया तो पुलिस ने एक घंटे तक उसे बाहर क्यों रखा। अगर, सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझते और समय पर इलाज मिलता तो आज प्रेम गमेती जीवित रहता। पत्नी बोली : पति कहते रहे मरने वाला हूं, हॉस्पिटल ले जाओ पत्नी ने बिलखते हुए कहा कि सुबह पति ने फोन कर बताया कि उन्हें चाकू मार दिया है। वह परिजनों के साथ मौके पर पहुंची और पति को सेटेलाइट हॉस्पिटल ले गए। वहां से एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। जहां डॉक्टर ने सिर्फ टांके लगाकर पट्टी कर दी। फिर कहा कि पहले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद इलाज किया जाएगा। वह थाने गए तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में करीब एक घंटा लगा दिया। इस दौरान पति कहते रहे कि सांस लेने में तकलीफ हो रही है। मैं मरने वाला हूं, हॉस्पिटल ले जाओ। उन्होंने आरोप लगाया कि घंटों तक पुलिस और डॉक्टर इधर-उधर दौड़ाते रहे। डॉक्टर और पुलिस ने मिलकर पति को मारा है। साला बोला: थाने से अस्पताल जाते समय तोड़ा दम
साले हीरालाल ने बताया कि घटना पता चली तो वह सुबह एमबी हॉस्पिटल पंहुचे। डॉक्टरों ने थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा। थाने में दो पुलिसकर्मी थे। इस दौरान जीजा बाहर एंबुलेंस में थे और बात कर रहे थे। एक घंटा थाने में रहे। वहां से हॉस्पिटल ले जाते हुए जीजा ने बोलना बंद कर दिया। फिर हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित कर दिया। इलाज के लिए जल्दी कर रहे थे परिजन और घायल: डॉ. सुमन
एमबी हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने कहा कि सुबह मौजूद डॉक्टरों से पता चला कि परिजन और घायल इलाज के लिए जल्दी कर रहे थे। घायल का कहना था कि जल्दी फ्री करो, बदला लेना है। ऐसे में लापरवाही किसकी रही? इसकी जांच के लिए कमेटी गठित की है। कमेटी अध्यक्ष डॉ. अखिलेश और 4 अन्य चिकित्सकीय टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद मामला साफ होगा। सूचना मिलती तो अस्पताल आकर रिपोर्ट दर्ज कर लेते: एसआई जाट
सवीना एसआई लादुराम जाट ने बताया कि परिजन को पहले घायल का इलाज कराने के लिए कहा था, लेकिन वह रिपोर्ट दर्ज कराने पर अड़ गए। ऐसे में रिपोर्ट दर्ज कर जवान को उनके साथ रवाना किया। रिपोर्ट दर्ज करने में 10-15 मिनट लगे। एक घंटे की बात गलत है। हॉस्पिटल प्रशासन या परिवादी चाकूबाजी की सूचना दे देते तो पुलिस मौके पर पहुंचकर भी रिपोर्ट दर्ज कर लेती। बाद में पता चला कि मामला हिरणमगरी थाने का है।


