छतरपुर जिले के नौगांव जनपद की लहदरा पंचायत के बरबई गांव में आजादी के 79 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं बन पाई है। गांव तक जाने वाला रास्ता अब भी कच्चा है, जो बारिश के मौसम में पूरी तरह कीचड़ से भर जाता है। इससे ग्रामीणों को रोजाना आने-जाने में भारी परेशानी होती है। यह मामला महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लहदरा के बरबई गांव का है। सड़क नहीं होने के कारण बारिश में गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से लगभग टूट जाता है। कई बार ग्रामीण गांव में ही फंसे रह जाते हैं, तो कभी दूसरे गांवों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है। गांव में सड़क, बिजली, पानी की सुविधा नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क के साथ-साथ बिजली, साफ पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। इतने साल बीत जाने के बाद भी गांव की हालत नहीं बदली, जिससे लोगों का जीवन कठिन हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बरबई गांव लहदरा पंचायत से करीब चार किलोमीटर और गलान गांव से एक किलोमीटर दूर है। गलान और हरपालपुर की ओर जाने वाले रास्ते भी जर्जर हालत में हैं। बड़े लोग किसी तरह कीचड़ से निकल जाते हैं, लेकिन स्कूली बच्चों के लिए यह रास्ता बड़ी परेशानी बन जाता है। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। गांव में 200 लोग रहते हैं ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत लहदरा हर साल कच्चे रास्ते पर मिट्टी और मुरुम डाल देती है, लेकिन इसके बाद कभी स्थायी मरम्मत या पक्की सड़क बनाने का काम नहीं हुआ। गांव में करीब 200 की आबादी है और लगभग 100 परिवार रहते हैं, लेकिन अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब गांव में कोई बीमार हो जाता है। कच्चे रास्ते की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। प्रसूता महिलाओं को भी बड़ी मुश्किल से कच्चे रास्ते से बाहर ले जाकर वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार देरी के कारण मां और बच्चे की सेहत पर भी खतरा बन जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने गांव में पक्की सड़क बनवाने की गंभीर पहल नहीं की है। आजादी के 79 साल बाद और अमृत काल में भी ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से ही गुजरना पड़ रहा है। इस मामले में स्थानीय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह टीकाराजा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।


