पाकिस्तान की जेल से रिहा हुए प्रसन्नजीत रंगारी आज शुक्रवार को अपने परिवार के साथ बालाघाट के लिए रवाना हो गए हैं। पांच दिनों तक अमृतसर में रहने के बाद वे आज रात तक घर पहुंचेंगे। प्रसन्नजीत को 31 जनवरी को पाकिस्तान की जेल से रिहा किया गया था। हालांकि, परिवार को उन्हें घर लाने में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति में कलेक्टर मृणाल मीणा ने हस्तक्षेप किया और प्रसन्नजीत को वापस लाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए। उन्होंने परिवार के साथ प्रशासनिक कर्मचारियों को अमृतसर भेजा।
प्रसन्नजीत की वापसी के लिए मां-बहन कर रहीं तैयारियां प्रसन्नजीत की सकुशल घर वापसी के लिए साथ गए जीआरएस योगेन्द्र चौधरी ने बताया कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीम प्रसन्नजीत को लेकर रवाना हो गई है। वे आज रात तक बालाघाट पहुंच जाएंगे। प्रसन्नजीत को लाने के लिए 3 फरवरी को प्रशासनिक टीम के साथ उनके जीजा राजेश खोब्रागढ़े, रोजगार सहायक योगेन्द्र चौधरी और पुलिसकर्मी लक्ष्मी बघेल अमृतसर गए थे। अब मां और बहन बेटे/भाई के घर लौटने का इंतजार कर रही हैं। 2017 में लापता हुआ था युवक प्रसन्नजीत 2017 में घर से लापता हो गए थे। वह कुछ समय बिहार गए और लौटे भी, लेकिन बाद में दोबारा गायब हो गए। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला और उन्हें मृत मान लिया गया था। दिसंबर 2021 में अचानक आए फोन से परिवार को पता चला कि वे पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। उनकी बहन संघमित्रा लगातार उनकी घर वापसी के लिए संघर्ष कर रही थीं। सालों बाद सुनी भाई की आवाज 1 फरवरी को खैरलांजी थाना पुलिस से फोन आने पर परिवार को रिहाई की जानकारी मिली। इसके बाद अमृतसर थाने से आए कॉल पर संघमित्रा ने वर्षों बाद अपने भाई की आवाज सुनी। इस दौरान भावनात्मक माहौल बन गया। प्रसन्नजीत के लापता होने के बाद उनके पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो चुका है। संयुक्त प्रयासों से प्रसन्नजीत घर लौटा बहन संघमित्रा राजेश खोब्रागढ़े, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विक्रम देशमुख और कलेक्टर मृणाल मीणा के संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रसन्नजीत पाकिस्तान से रिहा होकर अब घर लौट रहे हैं। गुरुवार को अमृतसर में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम बालाघाट के लिए रवाना हुई। ये खबर भी पढ़ें… 1. 7 साल बाद पाकिस्तान से घर वापसी, प्रसन्नजीत छोड़े गए भारतीय कैदियों में शामिल; बहन की जिद ने करवाई वतन वापसी
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा हो गए हैं। 31 जनवरी को पाकिस्तान द्वारा रिहा किए गए सात भारतीय कैदियों में उनका नाम भी शामिल है। वर्षों से उनकी वतन वापसी के लिए संघर्ष कर रहीं बहन संघमित्रा के प्रयास आखिरकार रंग ले आए। पढ़े पूरी खबर… 2.बहन हर साल करती है भाई के लौटने का इंतजार:पाकिस्तान की जेल में बंद है बालाघाट का प्रसन्नजीत, 6 साल पहले हुआ था लापता प्रिय भाई, मैं रक्षाबंधन पर तुझे बहुत याद करती हूं। मैं राखी बांधना चाहती हूं, लेकिन तू मुझसे बहुत दूर है। मैं तुझसे मिलना भी चाहती हूं। तू पाकिस्तान की जेल में बंद है। भारत सरकार से मांग करती हूं कि ये राखी पहुंचाकर एक बहन का अरमान पूरा करे। चिट्ठी में लिखी इस इबारत को पढ़ने के बाद संघमित्रा खुद को संभाल नहीं पाती और भाई की याद में रोने लगती है। वह पिछले 4 साल से अपने भाई को वापस भारत लाने की कोशिशें कर रही है। भारत सरकार को कई बार चिट्ठी लिख चुकी है लेकिन अभी तक उसे कोई कामयाबी नहीं मिली है। पढ़ें पूरी खबर…


