नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक दिन पहले हुए विरोध के बाद आज फिर भोपाल में ब्राह्मण समाज प्रदर्शन करेगा। यह प्रदर्शन एमपी नगर क्षेत्र में होगा। प्रदर्शन फिल्म के टाइटल, डायलॉग, निर्देशन और कलाकारों के विरोध में किया जाएगा। इधर, बढ़ते विरोध के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए फिल्म को पूरी तरह काल्पनिक बताया है। नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा कि यह एक फिक्शनल पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल किसी जाति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि एक काल्पनिक किरदार के उपनाम के तौर पर किया गया है। उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी समाज, धर्म या वर्ग को ठेस पहुंचाना नहीं है। नीरज पांडे ने यह भी कहा कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जिनका वे सम्मान करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फिल्म का टीजर और सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब से हटा दिया गया है। यूपी में मुख्यमंत्री ने दिए एफआईआर के निर्देश
विवाद ने कानूनी रूप भी ले लिया है। लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुख्यमंत्री के निर्देश पर फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत खुद हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की ओर से दर्ज कराई गई है। पुलिस के अनुसार फिल्म का नाम और कहानी एक विशेष जाति और समुदाय, खासकर ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दर्शाती है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है। दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग
इसके अलावा मुंबई के समता नगर थाने में भी फिल्म के टाइटल को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी कर मामले पर संज्ञान लिया है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें ‘पंडत’ के नाम से जाना जाता है। इसी नाम और कुछ संवादों को लेकर ब्राह्मण समाज और धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर नीरज पांडे की सफाई
फिल्म को लेकर डॉयरेक्टर नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, कि हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है। आगे उन्होंने लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है।


